करवा चौथ व्रत कथा 5 मिनट में पढ़ें, जानें पूरी कहानी

करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं.

मान्यता है कि करवा चौथ की पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का संकल्प पूरा होता है. इस दिन शाम को पूजा के समय कथा सुनने की परंपरा है.

लोकप्रिय कथा के अनुसार एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी. बेटी का विवाह हो चुका था. करवा चौथ के दिन उसने भी पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा.

दिनभर भूखी-प्यासी बहन को देखकर उसके भाइयों को चिंता हुई. उन्होंने बहन का व्रत खुलवाने के लिए पेड़ के पीछे छलनी और दीपक की मदद से चांद जैसा दृश्य बनाया.

बहन ने उस रोशनी को चांद समझ लिया और पूजा करने के बाद अपना व्रत खोल लिया. कथा के अनुसार व्रत अधूरा खुलने के कारण उसके पति पर संकट आ गया.

अपने पति की स्थिति देखकर वह दुखी हो गई. उसने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करवा चौथ का व्रत दोबारा करने का संकल्प लिया.

लोकमान्यता के अनुसार महिला ने करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा से रखा और पूजा-अर्चना की. इसके बाद उसके पति का संकट दूर हुआ और उसे वैवाहिक सुख की प्राप्ति हुई.

करवा चौथ की यह लोककथा श्रद्धा, संयम और वैवाहिक जीवन के प्रति समर्पण का संदेश देती है. 

करवा चौथ के दिन महिलाएं पूजा की थाली सजाकर करवा माता, भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करती हैं. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है.