हर दरिंदा बने ‘चांद सी हसीं बेटी का वारिस’

किन अल्फाज़ों से मांगें ऐ बेटी हम तुमसे माफी,कुछ कहने से डर आज मेरी रूह भी.कहने को इस मुल्क में हर धर्म के इंसान रहते हैं,पर हकीकत में जिस्म के भूखे हैवान रहते हैं. फर्क नहीं पड़ता है कि किस जाति-धर्म या कौम की थी,पर किसी की आंखों में खटकती हुई मुस्कुराती हुई जान थी.जब … Continue reading हर दरिंदा बने ‘चांद सी हसीं बेटी का वारिस’