महसूस कर ये चाहतें, नादां नहीं जरा चुलबुली हूं मैं

तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली हूं मैं,फूल-फूल मंडराने वाले भंवरे,सपनों भरी तितली हूं मैं. होगा तू कोई खिला फूल,मासूम इक कली हूं मैं.चेहरे देख तेरे हजार,जलन में जली हूं मैं. उठी न तेरे दिल में कभी,हां वो खलबली हूं मैं,महसूस … Continue reading महसूस कर ये चाहतें, नादां नहीं जरा चुलबुली हूं मैं