धर्मशास्त्रों के अनुसार ‘दान’ को बहुत बड़ा पुण्य माना गया है. कहा जाता है कि दान करने से मनुष्य के कई पाप कट जाते हैं और उसे स्वर्ग की प्राप्ति भी होती है. शायद इन्हीं मान्यताओं को आधार मानते हुए दान को इतना महत्व देते हैं और समय-समय से धार्मिक स्थलों या मंदिरों में जाकर दान-पुण्य कमाते हैं किंतु केवल धार्मिक स्थलों पर जाकर ही दान क्यों करना है?
क्यों ना दान घर के दरवाजे पर आए किसी जरूरतमंद के लिए किया जाए? शास्त्रों की एक मान्यता के अनुसार यदि आपके द्वार पर ये चार लोग आते हें तो कभी इन्हें खाली हाथ ना जाने दें-

भिखारी
आपके द्वार पर कोई भिखारी कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ ना जाने दें. आप उसे कुछ पैसे, कपड़े या खाने योग्य कोई वस्तु आदि भेजें.

किन्नर
आपके द्वार पर किन्नर आए और कुछ मांगे तो उसे भी खाली हाथ ना भेजें. किन्नरों को दान करने से कुंडली में बुध ग्रह को मजबूती मिलती है. किन्नरों को अवश्य दान करें. संभव हो तो इन्हें हरे रंग की कोई वस्तु दान कर दें.

दिव्यांग
कोई दिव्यांग व्यक्ति मदद की पुकार लगाने आए तो उसकी यथा योग्य सहायता करें.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसे लोगों को शनि-राहु का प्रतीक माना जाता है.
इन्हें कुछ दान करने से आपकी कुंडली में इन पापी ग्रहों का बुरा प्रभाव कम हो जाता है.

संत-महात्मा
आपके द्वार पर कोई सलाहकार या संत-महात्मा आए तो उन्हें भी खाली हाथ ना जानें दे.
ज्ञान प्राप्त करें, आशीर्वाद लें और उनके उपयोग की कोई वस्तु अवश्य ही दान करें.
ऐसा करने से घर में प्रसन्नता बनी रहती है.
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(Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं-परंपराओं के अनुसार हैं. Readmeloud इनकी पुष्टि नहीं करता है.)

