धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ हमारे और देवताओं के बीच की कड़ी होते हैं. अगर पितर प्रसन्न रहते हैं, तो परिजनों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उनका जीवन सुखी रहता है. अगर पितर नाराज हो जाते हैं, तो परिजनों को कई कष्ट झेलने पड़ते हैं. हिंदू धर्म शास्त्रों की मान्यता है कि पितर या तो मोक्ष को प्राप्त करते हैं या फिर वे पृथ्वी लोक में पुनः जन्म लेते हैं. इस लिए परिजनों को चाहिए पितर कभी उनसे नाराज न हों और पितृ दोष न लगे.

ऐसे होते हैं पितृ दोष के लक्षण

घर – परिवार में असामयिक निधन या दुर्घटनाओं का होना.
घर में किसी अनचाहे बच्चे का पैदा होना या विकलांग बच्चों का जन्म होना.
घर में किसी न किसी पारिवारिक सदस्य का बीमार होना या लम्बे समय तक बीमार रहना.
बच्चों द्वारा घर में बुजुर्गों का सम्मान न करना.
आपस में लड़ाई करना और बुजुर्गों को प्रताड़ित करना.
घर में विवाहित परिवार में गर्भ धारण न होना या असमय बच्चों का जन्म होना.
परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा करना.
परिवार के किसी सदस्य के विवाह में समस्याएं होना.
बुरी लत लगना और बुरे लोगों का साथ होना.

पितृ दोष को दूर करने के उपाय


पितृ पक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि पर तर्पण और पिंडदान कर श्राद्ध कर्म करें.
जरूरत मंद ब्राह्मणों को भोजन कराएं.
सोमवाती अमावस्या के दिन पितरों के नाम पर पितृभोग दें.
गोबर के कंडे जलाकर उन्हीं के नाम पर शुद्ध घी की आहूति दें.
आसमयिक मृत्यु होने वाले के नाम पर नारायणबलि की पूजा करें.
पितृ गायत्री का अनुष्ठान करवाएं.
पितरों के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर पूर्वजों के मोक्ष की कामना करें.

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