क्यों जल्दी खराब नहीं होता है जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद, जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों कारण
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क्यों जल्दी खराब नहीं होता है जगन्नाथ पुरी का महाप्रसाद, जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों कारण

Jagannath Puri ka Prasad: पुरी की पवित्र नगरी में समुद्र की लहरों के बीच खड़ा है भगवान जगन्नाथ का अद्भुत मंदिर, जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु आशीर्वाद पाने आते हैं. कहते हैं यहां भगवान किसी राजा की तरह नहीं, बल्कि आम इंसान की तरह रहते हैं – खाते हैं, आराम करते हैं और उत्सव मनाते हैं. मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है महाप्रसाद, जो मिट्टी के बर्तनों में पकता है और खराब नहीं होता. यहां का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है, जहाँ हजारों लोगों के लिए भोजन एक साथ तैयार होता है. स

बसे अनोखी बात यह है कि समुद्र के किनारे स्थित होने के बावजूद मंदिर के ऊपर से उड़ते पंछी नहीं दिखते और मंदिर का शिखर हर समय हवा के विपरीत दिशा में झुकता हुआ सा लगता है. हर साल का रथयात्रा उत्सव तो मानो आस्था का सागर उमड़ पड़ता है, जब तीनों भाई-बहन-जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा-भव्य रथों में विराजमान होकर भक्तों के बीच आते हैं. यही पुरी की पहचान है – रहस्य, भक्ति और दिव्यता का अनोखा संगम.

वहीं, जगन्नाथ पुरी के महाप्रसाद (अभद्र) को लेकर एक बड़ी मान्यता है कि यह खराब नहीं होता. यह विश्वास धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक कारणों – दोनों पर आधारित हैं. चलिए बताते हैं-

धार्मिक मान्यताएं
भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद के बारे में मान्यता है कि महाप्रसाद स्वयं भगवान जगन्नाथ का आशीष होता है, इसलिए उसमें कभी नकारात्मक शक्ति या अशुद्धि प्रवेश नहीं कर पाती.

देवी लक्ष्मी की कृपा – कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी स्वयं प्रसाद की रक्षा करती हैं. इसी कारण यह प्रसाद लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.

महिमा और विश्वास – सदियों से भक्तों का अनुभव रहा है कि यह प्रसाद जल्दी खराब नहीं होता, इसलिए इसे चमत्कार और दिव्यता से जोड़ा जाता है.

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प्रसाद खराब न होने के वैज्ञानिक कारण

विशेष पकाने की विधि – महाप्रसाद मिट्टी के बर्तनों (कुंडों) में लकड़ी की आंच पर पकाया जाता है. धीमी आंच पर पकने से यह अच्छी तरह स्टरलाइज़ हो जाता है. जिन बर्तनों में प्रसाद पकता है, वे छिद्रयुक्त होते हैं. इनमें नमी (moisture) नहीं टिकती, इसलिए बैक्टीरिया बढ़ नहीं पाते. सभी सामग्री (चावल, दाल, सब्ज़ी) अच्छी तरह उबाल कर बनाई जाती है. यह प्रक्रिया खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है. इसमें प्रिज़र्वेटिव्स नहीं होते, न ही अधिक तेल-घी. हल्का व सात्त्विक भोजन बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है. रसोईघर (अन्नपूर्णा भंडार) में एक साथ 56 भोग बनते हैं. इतनी बड़ी मात्रा में पकने और गर्म रहने के कारण यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.

इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रसाद भगवान की कृपा से कभी खराब नहीं होता, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इसकी पकाने की तकनीक, मिट्टी के बर्तन और सात्त्विक सामग्री इसे लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखते हैं.

जगन्नाथ पुरी के महाप्रसाद के बारे में शोध और परंपरागत मान्यताओं से यह सामने आता है कि यह सामान्य भोजन की तरह जल्दी खराब नहीं होता. तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि प्रसाद कितने दिन तक सही रहता है, तो बता दें कि साधारण प्रसाद (खिचड़ी, दाल, चावल, सब्ज़ी आदि) – यह सामान्यत: 2–3 दिन तक बिना खराब हुए सुरक्षित रहता है, भले ही गर्मी का मौसम हो. सर्दी या ठंडी जगह पर रखा जाए तो 5–6 दिन तक भी ठीक रह सकता है.
वहीं,

सूखा प्रसाद (खाजा, लड्डू, मिठाई, नारियल आदि हफ़्तों तक सुरक्षित रह सकता है. कुछ प्रसाद (जैसे खाजा) तो 1–2 महीने तक भी ख़राब नहीं होते. मिट्टी के बर्तन और धीमी आंच में पकने से यह भोजन लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. तेल-घी और अधिक नमी न होने से इसमें जल्दी बैक्टीरिया पनपते नहीं.

Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं-परंपराओं के अनुसार हैं. Readmeloud इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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