भारत में डिजिटल तकनीक अब केवल सरकारी सेवाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और कारोबार का नया माध्यम भी बन रही है. इसी दिशा में ग्रामीण विकास मंत्रालय का eSARAS प्लेटफॉर्म हजारों स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHGs) को देशभर के ग्राहकों से सीधे जोड़ रहा है.
यह सरकारी ऑनलाइन मार्केटप्लेस महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य उत्पाद और अन्य पारंपरिक वस्तुओं को बिना बिचौलियों के सीधे बाजार तक पहुंचाने का अवसर देता है.
क्या है eSARAS?
eSARAS, दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का आधिकारिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है. इसे विशेष रूप से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिए विकसित किया गया है.
इस प्लेटफॉर्म पर देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक उत्पाद उपलब्ध हैं. इनमें चंदेरी साड़ियां, पश्मीना उत्पाद, संगमरमर की कलाकृतियां, हस्तशिल्प, घरेलू सजावट का सामान, परिधान, खाद्य उत्पाद, पर्सनल केयर आइटम और बच्चों से जुड़े उत्पाद शामिल हैं.
लाखों महिलाओं को मिला डिजिटल बाजार
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार फरवरी 2024 तक 8.62 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को eSARAS के माध्यम से डिजिटल बाजार से जोड़ने की पहल की गई है. इनमें से लगभग 85 प्रतिशत महिलाएं सीधे मंत्रालय के नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं.
यह प्लेटफॉर्म केवल ऑनलाइन बिक्री की सुविधा ही नहीं देता, बल्कि उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में भी सहायता उपलब्ध कराता है.
कैसे बढ़ा eSARAS का दायरा?
शुरुआत में eSARAS केवल एक वेब पोर्टल था, लेकिन अब यह एक बड़े डिजिटल ई-कॉमर्स नेटवर्क में बदल चुका है.
सरकार ने इसे कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा है.
- ONDC के जरिए SHG उत्पाद 11 से अधिक खरीदारी ऐप पर उपलब्ध हैं, जहां 20 करोड़ से अधिक संभावित ग्राहक जुड़े हैं.
- UMANG ऐप पर भी eSARAS की सेवाएं उपलब्ध हैं.
- नई दिल्ली में SARAS आजीविका गैलरी स्थापित की गई है, जहां स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों का स्थायी प्रदर्शन और बिक्री होती है.
- SARAS Shakti Collection के माध्यम से कॉर्पोरेट और संस्थागत ग्राहकों के लिए विशेष उत्पाद श्रृंखला भी शुरू की गई है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत
ग्रामीण विकास मंत्रालय का मानना है कि eSARAS महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ देश की पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहा है.
DAY-NRLM वर्तमान में देश के 7,627 विकास खंडों में कार्य कर रहा है और जमीनी स्तर पर 1.51 करोड़ से अधिक सामुदायिक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार किया गया है, जो ग्रामीण उद्यमों को मजबूत बनाने में सहयोग कर रहा है.
आगे क्या है सरकार की योजना?
सरकार eSARAS को ONDC, UMANG और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ और व्यापक रूप से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है. इससे स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की पहुंच देशभर के साथ-साथ बड़े संस्थागत बाजारों तक भी बढ़ेगी.
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सरकार का मानना है कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने, स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और डिजिटल इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
Source: Ministry of Rural Development, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY)


