भारत में इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के दौरान इथेनॉल की संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर के आंकड़े को पार कर गई है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल 93 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. इसके साथ ही संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर से अधिक हो गई.
जुलाई में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित फीडस्टॉक की हिस्सेदारी करीब 76 प्रतिशत रही. जून में यह हिस्सेदारी लगभग 73 प्रतिशत थी. यानी कुल मासिक आपूर्ति में कमी आने के बावजूद अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ी है.
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जुलाई में 93 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति
जुलाई के दौरान कुल 93 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. इसमें अनाज आधारित स्रोतों से 71 करोड़ लीटर इथेनॉल आया. इसके मुकाबले जून में कुल 103 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई थी, जिसमें अनाज आधारित स्रोतों का योगदान 75 करोड़ लीटर था.
जुलाई में कुल आपूर्ति कम रही, लेकिन अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 76 प्रतिशत हो गई.
मक्का और FCI के अतिरिक्त अनाज प्रमुख स्रोत
जुलाई में अनाज आधारित इथेनॉल के लिए मक्का और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त अनाज प्रमुख स्रोत रहे. दोनों से 30-30 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई.
इन दोनों स्रोतों का योगदान मिलाकर अनाज आधारित इथेनॉल की करीब 85 प्रतिशत आपूर्ति रही. इसके अलावा क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से भी 11 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई.
आंकड़े बताते हैं कि इथेनॉल उत्पादन में अलग-अलग अनाज आधारित स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
गन्ना आधारित इथेनॉल की आपूर्ति में कमी
जुलाई में गन्ना आधारित फीडस्टॉक से 22 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. जून में यह मात्रा 28 करोड़ लीटर थी.
इस तरह जुलाई में गन्ना आधारित इथेनॉल की आपूर्ति में कमी आई. कुल मासिक आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी भी जून के करीब 27 प्रतिशत से घटकर जुलाई में करीब 24 प्रतिशत रह गई.
गन्ना आधारित आपूर्ति में बी-हेवी मोलासेस से 17 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 4 करोड़ लीटर और सी-हेवी मोलासेस से 1 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई.
800 करोड़ लीटर का आंकड़ा बड़ी उपलब्धि
AIDA की उप महानिदेशक भारती बालाजी ने 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार होने को भारत के इथेनॉल कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उनके अनुसार, यह घरेलू उद्योग द्वारा हासिल किए गए बड़े उत्पादन स्तर को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि मासिक आपूर्ति के मिश्रण में बदलाव भी महत्वपूर्ण है. जुलाई में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी जून के करीब 73 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई. इसमें मक्का और अतिरिक्त FCI अनाज दोनों ने 30-30 करोड़ लीटर का योगदान दिया.
बढ़ते उत्पादन के साथ मांग बढ़ाना अगली चुनौती
भारती बालाजी के अनुसार, आपूर्ति पक्ष ने अलग-अलग फीडस्टॉक और बढ़ते उत्पादन आधार के जरिए मांग के अनुरूप प्रतिक्रिया देने की क्षमता दिखाई है. अब अगली चुनौती इस बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता के लिए पर्याप्त मांग पैदा करना है.
उन्होंने कहा कि उच्च इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और इथेनॉल के व्यापक इस्तेमाल के जरिए इस उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है.
उनके मुताबिक, उद्योग ने पिछले एक दशक में मजबूत उत्पादन आधार तैयार किया है. अब प्राथमिकता इस क्षमता का कुशल इस्तेमाल सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.
इथेनॉल के इस्तेमाल के नए अवसरों पर जोर
AIDA के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ इसके इस्तेमाल के नए अवसर पैदा करना महत्वपूर्ण होगा. संगठन ने उच्च इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और इथेनॉल के व्यापक उपयोग को उत्पादन क्षमता के बेहतर इस्तेमाल से जोड़ा है.
साथ ही स्पष्ट और पूर्वानुमानित नीति ढांचे को निवेश बनाए रखने, कृषि मूल्य श्रृंखला को समर्थन देने और स्वच्छ घरेलू ईंधन की दिशा में भारत के बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है.
भारत में घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ने और स्वच्छ परिवहन तथा नवीकरणीय ईंधन से जुड़े लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के साथ इथेनॉल के इस्तेमाल के नए अवसरों को विकसित करना अब इस क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है.


