Atal Bihari Vajpayee Famous Poems: पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है. 16 अगस्त 2018 को दुनिया को अलविदा कहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में शामिल रहे, जिनकी पहचान एक कुशल राजनेता के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि के रूप में भी रही. उनकी कविताओं में संघर्ष, राष्ट्रप्रेम, उम्मीद, निराशा से लड़ने का साहस और जीवन को नए सिरे से गढ़ने का संदेश दिखाई देता है.
रविवार को उनकी पुण्यतिथि पर दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम नेताओं ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को याद किया. अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे. वर्ष 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. राजनीति के साथ साहित्य में भी उनकी गहरी पकड़ थी. उनकी कविताएं आज भी पाठकों को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने और हार न मानने की प्रेरणा देती हैं.
अटल बिहारी वाजपेयी की 10 प्रेरक रचनाएं
- बाधाएं आती हैं आएं
अटल जी की यह रचना संघर्ष के बीच कदम न रोकने का संदेश देती है. कविता में वह कहते हैं कि रास्ते में कितनी भी बाधाएं आएं, मनुष्य को उनका सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए. ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ की भावना जीवन में सामूहिक प्रयास और निरंतर संघर्ष की प्रेरणा देती है. - गीत नहीं गाता हूं
इस कविता में अटल जी ने अपने आसपास की परिस्थितियों और सामाजिक विडंबनाओं को लेकर पीड़ा व्यक्त की है. ‘बेनकाब चेहरे’ और ‘दाग बड़े गहरे हैं’ जैसे भाव व्यवस्था और समाज की सच्चाइयों से सामना कराते हैं. कविता का दर्द पाठक को भीतर तक छू जाता है. - गीत नया गाता हूं
‘टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी’ से शुरू होने वाली यह रचना निराशा के बीच उम्मीद की आवाज है. अटल जी लिखते हैं कि सपने टूटने के बावजूद हार नहीं माननी चाहिए. नया संघर्ष और नई उम्मीद ही जीवन को आगे ले जाती है. - कौरव कौन, कौन पांडव
इस रचना में महाभारत के प्रतीकों के जरिए अटल जी ने राजनीति और समाज की जटिल परिस्थितियों पर सवाल उठाए. वह पूछते हैं कि जब दोनों ओर छल और कूटनीति का जाल हो तो सही और गलत की पहचान कैसे की जाए. कविता आज के संदर्भों में भी विचार करने को मजबूर करती है. - एक बरस बीत गया
समय के गुजरने और किसी प्रिय के इंतजार की भावनाओं को यह कविता बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है. बदलते मौसम, बीतते दिन और लौटकर न आने वाले ‘मीत’ की प्रतीक्षा कविता को भावुक बना देती है. - पंद्रह अगस्त का दिन कहता
अटल जी की यह कविता स्वतंत्रता के अधूरे सपनों और विभाजन की पीड़ा को सामने लाती है. आजादी के बाद भी विस्थापित लोगों के दर्द और उन सपनों की याद दिलाती है, जिन्हें पूरा होना अभी बाकी था. - क्षमा करो बापू! तुम हमको
इस रचना में महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण को संबोधित करते हुए अटल जी आत्ममंथन करते नजर आते हैं. वह टूटे सपनों को फिर जोड़ने और अंधकार के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प व्यक्त करते हैं. - भारत जमीन का टुकड़ा नहीं
अटल बिहारी वाजपेयी की राष्ट्रभावना को समझने के लिए यह रचना बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसमें भारत को केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रपुरुष के रूप में देखा गया है. हिमालय से लेकर कन्याकुमारी और सागर तक भारत की एक विराट तस्वीर कविता के माध्यम से सामने आती है. - आदमी को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़े
अटल जी की यह प्रेरक पंक्ति जीवन के संघर्ष का सार बताती है. परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, इंसान को उनसे लड़ते हुए आगे बढ़ना चाहिए. एक सपना टूट जाए तो निराश होकर रुकने के बजाय नया सपना गढ़ने का संदेश इसमें मिलता है. - देश एक मंदिर है
अटल जी की राष्ट्रभक्ति का भाव इस विचार में स्पष्ट दिखाई देता है. उनके अनुसार देश केवल जमीन नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जिसके प्रति हर नागरिक की जिम्मेदारी है. राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्य को उन्होंने पूजा के समान माना.
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राजनीति से आगे, कविता में भी जिंदा हैं अटल
अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व राजनीति की सीमाओं से कहीं बड़ा था. संसद में उनके भाषणों की तरह उनकी कविताओं में भी शब्दों की ताकत दिखाई देती है. कहीं वह टूटे सपनों का दर्द लिखते हैं, तो कहीं संघर्ष के बीच नया गीत गाने का साहस देते हैं. यही वजह है कि उनके निधन के वर्षों बाद भी उनकी कविताएं लोगों को उम्मीद, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम का रास्ता दिखाती हैं.


