भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों की गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल को आगे बढ़ाया गया है. आयुष मंत्रालय के तहत फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (PCIM&H) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने ‘वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड’ पहल के लिए अपने समझौता ज्ञापन (MoU) को तीन साल के लिए नवीनीकृत किया है.
इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल होने वाले एक ही औषधीय पौधे के लिए समान, स्पष्ट, वैज्ञानिक और भरोसेमंद गुणवत्ता मानक तैयार करना है. केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने इस सहयोग को पारंपरिक दवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया.
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एक औषधीय पौधे के लिए समान मानक बनाने पर जोर
‘वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड’ पहल के तहत एक ही औषधीय पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी जैसी विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में होने की स्थिति में उसके लिए एक समान और वैज्ञानिक मानक तैयार करने की कोशिश की जा रही है.
प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियां देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और औषधीय पौधों की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे में दवाओं और औषधीय पौधों की गुणवत्ता, शुद्धता और मानकीकरण सुनिश्चित करना जरूरी है.
समान मानकों से अलग-अलग हितधारकों के बीच संभावित भ्रम कम करने और औषधीय पौधों के मानकीकरण के लिए एक मजबूत और समन्वित व्यवस्था बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
पहले चरण में तैयार किए गए 50 मोनोग्राफ
यह सहयोग नया नहीं है. दोनों संस्थानों के बीच ‘वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड’ पहल को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2022 में MoU शुरू किया गया था. इसके पहले चरण के तहत औषधीय पौधों से जुड़े 50 मोनोग्राफ तैयार किए गए.
अब नवीनीकृत तीन साल के समझौते के तहत इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा. इसका उद्देश्य अलग-अलग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले एक ही पौधे के लिए मानकों को अधिक harmonise करना है.
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखा जाएगा
नए चरण में तैयार किए जाने वाले मोनोग्राफ में भारतीय मानकों के साथ अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा. इसके जरिए भारतीय मानकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
मंत्रालय के अनुसार, इससे भारतीय औषधीय पौधों और उनसे तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की स्वीकार्यता को भी मजबूत करने का लक्ष्य है.
निर्माताओं और निर्यातकों के लिए आसान हो सकती हैं प्रक्रियाएं
एक समान और स्पष्ट गुणवत्ता मानकों से केवल दवाओं की गुणवत्ता पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इससे उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्षों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में भी मदद मिल सकती है.
निर्माताओं, निर्यातकों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और नियामक संस्थानों के लिए स्पष्ट मानक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं. केंद्रीय मंत्री ने इसे Ease of Doing Business से भी जोड़ा.
आयुर्वेद से होम्योपैथी तक कई प्रणालियां होंगी शामिल
नवीनीकृत MoU के तहत आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी में इस्तेमाल होने वाली पौधों से संबंधित single drugs के लिए वैज्ञानिक गुणवत्ता मानक विकसित किए जाएंगे.
इस सहयोग में PCIM&H और IPC की वैज्ञानिक और मानक निर्धारण से जुड़ी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा. दोनों संस्थानों के बीच समन्वय से औषधीय पौधों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक अधिक मजबूत व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है.
भारत की औषधीय पौधों की विरासत को संरक्षण
इस पहल को भारत की जैव विविधता और पारंपरिक चिकित्सा विरासत से भी जोड़ा गया है. औषधीय पौधों के लिए वैज्ञानिक मानकों के विकास से उनकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
प्रतापराव जाधव ने PCIM&H और IPC के नेतृत्व, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने उम्मीद जताई कि नवीनीकृत तीन साल का MoU औषधीय पौधों के मानकीकरण के काम को नई गति देगा.
वैश्विक स्तर पर मानकीकरण में भारत की भूमिका
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य भारत में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों और पारंपरिक दवाओं के गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है. भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने से देश के पारंपरिक चिकित्सा उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में मदद मिल सकती है.
PCIM&H और IPC के बीच यह अंतर-मंत्रालयी सहयोग वैज्ञानिक मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की विश्वसनीयता को एक साथ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ाया गया कदम है.


