गाजियाबाद में सड़कों की मरम्मत और उनकी उम्र बढ़ाने के लिए नगर निगम नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है. इसके तहत पहली बार माइक्रो सरफेसिंग तकनीक से सड़क सुधार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 8.31 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पहले चरण में राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन मेट्रो स्टेशन तक सड़क के दोनों ओर सुधार कार्य किया जाएगा.
नगर निगम का कहना है कि इस तकनीक से कम खर्च में सड़क की सतह को बेहतर बनाया जा सकता है और उसकी उपयोगी उम्र बढ़ाने में मदद मिल सकती है. पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर आगे एलिवेटेड रोड की पूरी सड़क पर भी इस तकनीक का इस्तेमाल करने पर विचार किया जाएगा.
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राजनगर एक्सटेंशन से हिंडन मेट्रो स्टेशन तक होगा काम
गाजियाबाद नगर निगम इस परियोजना के जरिए सड़क मरम्मत के एक नए तरीके को आजमाने जा रहा है. नगर निगम के मुख्य अभियंता एनके चौधरी के मुताबिक, गाजियाबाद में निगम पहली एजेंसी होगी, जो इस तकनीक से सड़क सुधार का काम कराएगी.
पहले चरण में राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन मेट्रो स्टेशन तक दोनों ओर की सड़क को सुधारा जाएगा. इस काम के लिए करीब 8.31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. परियोजना से मिलने वाले परिणामों के आधार पर आगे दूसरी सड़कों पर भी इस तकनीक के इस्तेमाल का फैसला लिया जा सकता है.
क्या है माइक्रो सरफेसिंग तकनीक?
माइक्रो सरफेसिंग सड़क की मौजूदा सतह को बेहतर बनाने की तकनीक है. इसमें सड़क पर बिटुमेन इमल्शन और बारीक गिट्टी के मिश्रण की पतली परत बिछाई जाती है. इससे सड़क की सतह चिकनी और एकसमान बनाने में मदद मिलती है.
स्रोत में दी गई जानकारी के अनुसार, सामान्य डामर सड़क में लगभग 6 इंच की परत हटाकर नई परत बिछाने के बजाय माइक्रो सरफेसिंग में करीब 6 से 8 मिलीमीटर की कोटिंग की जाती है. इस प्रक्रिया से सड़क की सतह को सुधारने और उसकी उपयोगी अवधि बढ़ाने का लक्ष्य है.
दरार वाली सड़कों के लिए उपयोगी, बड़े गड्ढों के लिए नहीं
यह तकनीक खास तौर पर उन सड़कों के लिए उपयोगी बताई गई है जो हाल में बनी हों, लेकिन उनकी सतह पर दरारें आने लगी हों. समय रहते माइक्रो सरफेसिंग कराने से सड़क को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, यह तकनीक बड़े-बड़े गड्ढों वाली सड़कों के लिए नहीं है. इसलिए सड़क की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर ही तय किया जाएगा कि वहां माइक्रो सरफेसिंग उपयुक्त होगी या नहीं.
नगर निगम की ओर से सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी को मोबाइल लैब की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी. इससे परियोजना में निर्धारित तकनीकी जरूरतों के अनुसार काम कराने की व्यवस्था की जाएगी.
एक दिन में एक किलोमीटर सड़क की मरम्मत का दावा
दी गई जानकारी के मुताबिक, माइक्रो सरफेसिंग तकनीक से एक दिन में औसतन एक किलोमीटर सड़क की मरम्मत की जा सकती है. इस प्रक्रिया के करीब दो घंटे बाद यातायात बहाल किया जा सकता है.
इस तकनीक का एक उद्देश्य सड़क सुधार के दौरान होने वाली असुविधा को सीमित रखना भी है. हालांकि, वास्तविक काम की गति और यातायात बहाल करने का समय सड़क की स्थिति तथा काम के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
पायलट प्रोजेक्ट के बाद एलिवेटेड रोड पर भी इस्तेमाल की योजना
नगर निगम इस तकनीक को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करेगा. मुख्य अभियंता एनके चौधरी के अनुसार, परियोजना के नतीजों के आधार पर एलिवेटेड रोड की पूरी सड़क पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
नगर निगम का उद्देश्य कम खर्च में सड़क की सतह सुधारना और उसकी उम्र बढ़ाना है. यदि पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम उपयोगी रहते हैं, तो भविष्य में शहर की दूसरी उपयुक्त सड़कों के लिए भी यह तकनीक विकल्प बन सकती है
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