हर दरिंदा बने ‘चांद सी हसीं बेटी का वारिस’
किन अल्फाज़ों से मांगें ऐ बेटी हम तुमसे माफी,कुछ कहने से डर आज मेरी रूह भी.कहने को इस मुल्क में […]
किन अल्फाज़ों से मांगें ऐ बेटी हम तुमसे माफी,कुछ कहने से डर आज मेरी रूह भी.कहने को इस मुल्क में […]
सुनो, जब दुनिया आंखें चार कर रही है,मैं अपनी तन्हाई संग तुम्हारा इंतजार कर रही हूं, महफिलों में सब उड़ाते
अम्मा…अम्मा… आटे की चिरैया बना दो,वो उड़े न तो वही कागज के पंख लगा दो,मैं हाथों में लेकर पूरे घर
मेरा सपना, मेरा बचपनआज भी वो बचपन याद आता है. वो तेरी-मेरी पेंसिल बड़ी-छोटी करना,वो छोटा-छोटी बातों पर शिकायत करना,वो
हां, तुम्हारी फिक्र करना,रोज तुम्हें परेशान करना,तुम्हारी खुशियों में खुश हो जाना,रात को सबसे छुपकर तुमसे बात करना,अपनी यादों में
तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली
महसूस कर ये चाहतें, नादां नहीं जरा चुलबुली हूं मैं और देखें »
सुबह उठ जाएं जो एक बार,दिन भर जुटे रहते हैं हम,न लेकर चैन की सांस,घंटों काम करते रहते हैं हम.आखिर
चाहत हीरे-मोतियों की नहीं,अंगूठी तेरी उंगलियों की चाहिए. चाहत किसी इत्र की नहीं,महक अपनी सांसों में बस तुम्हारी चाहिए. उड़ने
चाहत हीरे-मोतियों की नहीं, अंगूठी तेरी उंगलियों की चाहिए और देखें »
तुमने मुझे चूड़ियां पहनाईं,मैं मैरीकॉम बन गई.तुमने मुझे पायल पहनाई,मैं पी टी ऊषा बन गई. 6 मीटर की साड़ी में
सुनो न… वो पापा की परी समझदार हो गई है,जो घंटों मायके में सोया करती थी,वो जल्दी उठने वाले लोगों