Delhi Yamuna Cleaning Drive: दिल्ली में यमुना नदी की सफाई के लिए चलाए गए ‘चलो यमुना’ अभियान में 35 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. 18 अक्टूबर को चलाए गए इस अभियान के तहत नदी के किनारे 70 स्थानों पर सफाई की गई और एक ही सुबह में 76,755 किलोग्राम कचरा हटाया गया. दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सोमवार को अभियान की जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इन परियोजनाओं की कुल लागत 8,941.22 करोड़ रुपये है.
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70 जगहों पर चला सफाई अभियान
‘चलो यमुना’ अभियान के तहत वजीराबाद के सूर घाट और सिग्नेचर ब्रिज से लेकर यमुना बाजार, आईटीओ, निजामुद्दीन, सराय काले खां और चिल्ला तक सफाई की गई. इसमें स्थानीय नागरिकों, परिवारों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सदस्यों, छात्रों, स्वयंसेवकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
आंकड़ों के मुताबिक, अभियान में करीब 20 हजार नागरिकों और RWA सदस्यों, 10,500 पार्टी कार्यकर्ताओं, 2,500 छात्रों और 2,000 NGO स्वयंसेवकों ने भाग लिया. दिल्ली विश्वविद्यालय के 25 से अधिक कॉलेजों के विद्यार्थी भी सफाई अभियान में शामिल हुए. इनमें देशबंधु कॉलेज के 400 से ज्यादा छात्र थे.
सफाई के लिए लगाई गईं मशीनें और नावें
अभियान को बड़े स्तर पर चलाने के लिए 26 जेसीबी, 19 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, 24 नावें, सात वीड हार्वेस्टर और ट्रैश स्किमर तैनात किए गए. इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (PWD) की 269 मेंटेनेंस वैन भी लगाई गईं.
इस अभियान में 10 से अधिक विभागों ने मिलकर काम किया. इनमें सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC), PWD, MCD, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), DUSIB, दिल्ली पुलिस और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) शामिल रहे. उस्मानपुर गांव से करीब सात टन और सोनिया विहार से 5.6 टन से अधिक कचरा हटाया गया.
अमित शाह करेंगे 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के मुताबिक, 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा. इनमें 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, जिनकी लागत 2,827.11 करोड़ रुपये है. वहीं, 33 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, जिन पर 6,114.11 करोड़ रुपये खर्च होने हैं.
इन परियोजनाओं का मकसद सीवेज ट्रीटमेंट, पानी की आपूर्ति और सीवर नेटवर्क को मजबूत करना है, ताकि यमुना में गंदे पानी का प्रवाह कम किया जा सके.
ओखला में बनेगा 1,161 करोड़ का नया STP
परियोजनाओं में ओखला में 124 MGD क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाना शामिल है. इस पर 1,161 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा आठ मौजूदा STP को अपग्रेड करने के लिए 1,041 करोड़ रुपये की योजना है.
इन आठ संयंत्रों की संयुक्त क्षमता 78.2 MGD से बढ़ाकर 140.8 MGD की जाएगी. इससे करीब 78.5 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है.
358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों को फायदा
योजना के तहत 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 विकेंद्रीकृत STP और सीवेज पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे. इनसे 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों में रहने वाले करीब 36.29 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है.
इसके साथ ही 1,691 करोड़ रुपये की लागत से 1,034 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क विकसित किया जाएगा. इससे सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोकने और उसे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.
चंद्रावल में 477 MLD क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चंद्रावल में 477 MLD क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा. इस परियोजना की लागत 298.3 करोड़ रुपये बताई गई है. यह संयंत्र 1935 और 1955 में बने पुराने संयंत्रों की जगह लेगा और करीब 22 लाख लोगों को सेवा देगा.
इसके अलावा 225.02 करोड़ रुपये की लागत से मुंडका में 4.5 किलोमीटर लंबा ट्रंक ड्रेन भी बनाया जाएगा.
‘सिर्फ किनारे साफ करने से नहीं रुकेगा प्रदूषण’
जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए केवल नदी के किनारों की सफाई पर्याप्त नहीं है. इसके लिए नदी में गिरने वाले सीवेज को रोकना भी जरूरी है. सरकार का जोर सीवेज प्रबंधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है.
‘बर्थडे विद यमुना’ पहल भी शुरू
मंत्री ने ‘बर्थडे विद यमुना’ पहल की भी घोषणा की. इसके तहत नदी किनारे ऐसे स्थानों पर झोपड़ियां या अस्थायी व्यवस्था की जाएगी, जहां लोग यमुना के साथ अपना जन्मदिन मना सकें. प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि वह खुद 7 नवंबर को यमुना के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे और दिल्लीवासियों से भी इस पहल में शामिल होने की अपील की.
सरकार का कहना है कि सफाई अभियान को एक दिन की गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे लगातार चलने वाले जनआंदोलन में बदलने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, यमुना की सफाई का दीर्घकालिक असर सीवेज ट्रीटमेंट और गंदे पानी के नदी में प्रवेश को रोकने जैसे उपायों पर निर्भर करेगा.
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