रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकम्युनिकेशन कारोबार से जुड़ी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को शेयर बाजार में पहले ही दिन जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. बुधवार को इश्यू खुलने के कुछ ही समय के भीतर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) कैटेगरी में मांग निर्धारित शेयरों से दोगुनी से ज्यादा हो गई. दिन के अंत तक आईपीओ कुल मिलाकर तीन गुना सब्सक्राइब हो चुका था.
जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. कंपनी के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और रिलायंस जियो इन्फोकॉम के विस्तार के लिए किया जाएगा. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बताया गया है. इससे पहले इसी महीने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 22,560 करोड़ रुपये का आईपीओ आया था.
हालांकि, आईपीओ को मिले मजबूत शुरुआती रिस्पॉन्स के बावजूद निवेशकों के लिए लिस्टिंग के दिन शेयर का प्रदर्शन और लंबी अवधि में कंपनी की संभावनाएं अलग-अलग विषय हैं. पहले भी कई बड़े आईपीओ को लेकर काफी उत्साह रहा, लेकिन उनकी लिस्टिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही.
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पहले दिन तीन गुना सब्सक्राइब हुआ जियो का आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. यह इश्यू शुक्रवार को बंद होगा.
पहले दिन आईपीओ को कुल मिलाकर तीन गुना सब्सक्रिप्शन मिला. QIB कैटेगरी में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले करीब नौ गुना बोलियां आईं. वहीं, रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा 68 फीसदी सब्सक्राइब हुआ.
QIB कैटेगरी के लिए 4,90,07,827 शेयर ऑफर किए गए थे. इश्यू खुलने के शुरुआती समय में ही इस श्रेणी में मांग तेजी से बढ़ी और आधे घंटे से भी कम समय में बोलियां आरक्षित शेयरों की संख्या से दोगुनी हो गईं.
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी-50 इस साल अब तक 12 फीसदी से अधिक गिर चुका था. निफ्टी-50 में भारत की 50 प्रमुख कंपनियों के शेयर शामिल हैं.
जियो का आईपीओ क्यों है खास?
जियो का आईपीओ कई कारणों से बाजार में चर्चा का विषय है. पहला, इसका आकार 30,213 करोड़ रुपये है, जो इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनाता है. दूसरा, यह रिलायंस समूह का करीब दो दशक में पहला पब्लिक इश्यू है.
रिलायंस समूह की कंपनियों को रिटेल निवेशक लंबे समय से संपत्ति बनाने वाली कंपनियों के रूप में देखते आए हैं. समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी शेयरधारकों को अक्सर ‘रिलायंस परिवार’ का हिस्सा कहते थे. यह परंपरा आगे भी जारी रही है और इससे समूह की कंपनियों के प्रति निवेशकों का एक वफादार आधार तैयार हुआ है.
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और रिलायंस जियो इन्फोकॉम के विस्तार में किया जाएगा. कंपनी की भविष्य की संभावनाओं को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी के पीछे उसका डिजिटल नेटवर्क और कारोबार बढ़ाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
बड़े आईपीओ की लिस्टिंग का रिकॉर्ड क्या बताता है?
जियो के आईपीओ को मिले शुरुआती समर्थन के बीच पिछले कुछ वर्षों के बड़े आईपीओ की लिस्टिंग पर भी नजर डालना जरूरी है. 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आकार वाले 13 आईपीओ में से आठ ने लिस्टिंग के समय वैसा प्रदर्शन नहीं किया, जिसकी ज्यादातर निवेशक उम्मीद कर रहे थे.
NSE का आईपीओ
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ इसी साल सितंबर में आया था. स्रोत के मुताबिक, NSE के शेयर इश्यू प्राइस से सिर्फ 0.84 फीसदी प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे.
Hyundai Motor India
ह्यूंदै मोटर इंडिया का 27,858 करोड़ रुपये का आईपीओ अक्टूबर 2024 में आया था. इसके शेयर 1,960 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,934 रुपये पर सूचीबद्ध हुए. यानी लिस्टिंग इश्यू प्राइस से नीचे हुई.
LIC
देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC की लिस्टिंग भी निवेशकों के लिए निराशाजनक रही थी. मई 2022 में इसके शेयर 949 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 867.20 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे. यह इश्यू प्राइस से 8.62 फीसदी कम था.
Paytm
Paytm की मूल कंपनी One97 Communications का 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ नवंबर 2021 में आया था. इसके शेयर 2,150 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,950 रुपये पर सूचीबद्ध हुए. यह इश्यू प्राइस से 9.3 फीसदी कम था. इसके बाद से शेयर का सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है.
LG Electronics India
LG Electronics India का आईपीओ अक्टूबर 2025 में आया था और इसे भी निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला था. स्रोत के मुताबिक, इसके शेयर इश्यू प्राइस से 50 फीसदी प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे. इन पांच उदाहरणों से पता चलता है कि बड़े आईपीओ की लिस्टिंग का प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है.
बाजार की सुस्ती के बीच आईपीओ में दिलचस्पी क्यों?
केजरीवाल रिसर्च एंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के अरुण केजरीवाल ने BBC से कहा कि शेयर बाजार में सुस्ती के बावजूद आईपीओ बाजार में हलचल बनी हुई है. उनके मुताबिक, आकर्षक वैल्यूएशन और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की क्षमता रखने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों में संस्थागत और छोटे निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.
उन्होंने बताया कि कुछ आईपीओ की कीमतें पहले से सूचीबद्ध कंपनियों की तुलना में कम वैल्यूएशन और कम प्राइस-टु-अर्निंग (P/E) रेशियो को ध्यान में रखकर तय की जा रही हैं. इससे निवेशकों को ऐसे इश्यू आकर्षक लग सकते हैं.
P/E रेशियो बताता है कि निवेशक किसी कंपनी की कमाई के हर एक रुपये के लिए कितनी कीमत चुकाने को तैयार हैं. हालांकि, केवल कम P/E रेशियो के आधार पर किसी शेयर के भविष्य के प्रदर्शन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. कंपनी की कमाई, कारोबार की संभावनाएं और प्रतिस्पर्धा जैसे दूसरे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं.
जियो के सामने क्या हैं चुनौतियां?
सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो मजबूत नेटवर्क, बड़े बुनियादी ढांचे और विकसित होते डिजिटल इकोसिस्टम के कारण मध्यम से लंबी अवधि में वृद्धि की संभावनाएं रखती है.
हालांकि, कंपनी के सामने प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती है. इसमें सेवाओं की कीमतों को लेकर प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों के दूसरी कंपनियों की ओर जाने का जोखिम शामिल है.
टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अरबपति एलन मस्क ने भी रिलायंस जियो को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी. उन्होंने कहा था कि उनकी कंपनी Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत में किफायती कीमत पर उपलब्ध कराई जाएगी. व्यावसायिक सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी में देरी के बीच मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुकेश अंबानी की आलोचना भी की थी. अंबानी या रिलायंस ने इन टिप्पणियों पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया.
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है जियो का आईपीओ?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को पहले दिन मिला मजबूत सब्सक्रिप्शन निवेशकों की दिलचस्पी को दर्शाता है. लेकिन सब्सक्रिप्शन के आंकड़े और शेयर की लिस्टिंग पर मिलने वाला रिटर्न एक ही बात नहीं हैं.
NSE, Hyundai Motor India, LIC, Paytm और LG Electronics India की लिस्टिंग के उदाहरण दिखाते हैं कि बड़े इश्यू का बाजार में शुरुआती प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है. जियो की लिस्टिंग और उसके बाद शेयर का प्रदर्शन बाजार की स्थिति, कंपनी के मूल्यांकन, कारोबारी नतीजों और प्रतिस्पर्धा सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा.
इसलिए निवेशकों के लिए आईपीओ के आकार या शुरुआती मांग के साथ-साथ कंपनी के कारोबार, मूल्यांकन और जोखिमों को समझना भी जरूरी है. जियो के आईपीओ का अंतिम सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग के दिन का प्रदर्शन इश्यू बंद होने और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
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