Prayagraj Metro Project: संगम नगरी प्रयागराज में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में सफर की तस्वीर बदल सकती है. शहर में मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना पर एक बार फिर काम तेज हो गया है. लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो सेवाओं के बाद अब प्रयागराज में भी आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है. इसके लिए दो प्रस्तावित कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है.
रेलवे की तकनीकी परामर्शदाता संस्था राइट्स (RITES) ने नई DPR उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) को सौंप दी है. अब परियोजना को शासन स्तर पर मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. इसके बाद DPR केंद्र सरकार को भेजी जाएगी. केंद्र से स्वीकृति मिलने पर परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो सकेगा.
प्रयागराज में कहां से कहां तक चलेगी मेट्रो?
प्रस्तावित योजना में शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए दो कॉरिडोर बनाए जाने की बात है. इनसे शहर के आवासीय इलाकों, प्रमुख परिवहन केंद्रों और एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी बेहतर करने का लक्ष्य है.
पहला कॉरिडोर: शांतिपुरम से नैनी छिवकी तक
पहले कॉरिडोर के तहत शांतिपुरम से नैनी के छिवकी क्षेत्र तक मेट्रो चलाने का प्रस्ताव है. इससे शहर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिल सकती है.
दूसरा कॉरिडोर: झूंसी से एयरपोर्ट तक
दूसरे कॉरिडोर में झूंसी से बमरौली होते हुए एयरपोर्ट और एयरोसिटी क्षेत्र तक कनेक्टिविटी देने की योजना है. इससे शहर के पूर्वी हिस्से को एयरपोर्ट से जोड़ने में मदद मिल सकती है.
परेड में बनेगा बड़ा इंटरचेंज, रोपवे से भी जुड़ाव
नई DPR में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी किया गया है. झूंसी-बमरौली कॉरिडोर को एयरपोर्ट तक विस्तार देने का प्रस्ताव शामिल किया गया है. इसके अलावा परेड में दोनों मेट्रो कॉरिडोर के जंक्शन को रोपवे स्टेशन से जोड़ने की योजना भी रखी गई है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य मेट्रो और रोपवे के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना है. यदि योजना को मंजूरी मिलती है, तो यात्रियों को शहर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने के लिए परिवहन के अलग-अलग साधनों का विकल्प मिल सकता है.
12 हजार करोड़ रुपये की परियोजना, अब आगे क्या?
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष ऋषिराज के अनुसार, मेट्रो परियोजना की नई DPR तैयार हो चुकी है. करीब 12 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना को पहले शासन स्तर पर मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.
प्रयागराज में मेट्रो को लेकर पहले पूर्ण मेट्रो प्रणाली की DPR तैयार की गई थी. बाद में शासन के निर्देश पर राइट्स ने कम लागत वाली मेट्रो लाइट प्रणाली की रिपोर्ट बनाई थी, जिसमें छोटे स्टेशनों का प्रस्ताव था. इसके बाद UPMRC के सुझाव पर पिछले साल फिर से पूर्ण मेट्रो प्रणाली के लिए सर्वे शुरू किया गया.
अब नई DPR में भी दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं. हालांकि, परियोजना की अंतिम मंजूरी, निर्माण शुरू होने की तारीख और यात्रियों के लिए मेट्रो सेवा शुरू होने का समय अभी तय नहीं माना जा सकता.
कानपुर मेट्रो में भी बढ़ रही सुविधाएं
इसी बीच कानपुर मेट्रो के भूमिगत नेटवर्क में भी काम आगे बढ़ा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों कॉरिडोर के कुल 10 भूमिगत स्टेशनों पर ट्रायल और टेस्ट रन की प्रक्रिया पूरी की गई है.
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 में चुन्नीगंज, नवीन मार्केट, बड़ा चौराहा, नयागंज और कानपुर सेंट्रल जैसे भूमिगत स्टेशनों पर पहले से यात्री सेवाएं चल रही हैं. वहीं, झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशनों पर भी ट्रायल पूरा होने की जानकारी दी गई है.
प्रयागराज के लोगों को कब मिलेगी मेट्रो?
प्रयागराज में मेट्रो चलाने की दिशा में DPR तैयार होना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी परियोजना को शासन और केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही निर्माण, बजट आवंटन और संचालन से जुड़ी समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी.
फिलहाल, संगम नगरी के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रस्तावित मेट्रो परियोजना को कब मंजूरी मिलती है और शांतिपुरम, नैनी, झूंसी तथा एयरपोर्ट के बीच आधुनिक परिवहन का सपना कब हकीकत बनता है.
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