नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR), हैदराबाद ने एक नई Smart Seed Coating Technology विकसित की है. यह तकनीक बीजों की गुणवत्ता बढ़ाने, फसल स्थापना को मजबूत करने और किसानों की उत्पादकता में सुधार लाने के लिए तैयार की गई है.
ICAR-IIOR द्वारा विकसित इस बायोपॉलीमर आधारित स्मार्ट सीड तकनीक को भारतीय पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों में 30 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन देने में सक्षम है.
क्या है Smart Seed Coating Technology
Smart Seed Coating Technology एक विशेष बायोडिग्रेडेबल बायोपॉलीमर पर आधारित प्रणाली है, जो बीज के चारों ओर एक बहुउद्देश्यीय सुरक्षात्मक परत तैयार करती है.
यह परत बीज को लाभकारी सूक्ष्मजीव, पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व, पौध संरक्षण एजेंट और पौध वृद्धि को बढ़ावा देने वाले तत्व उपलब्ध कराती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये सभी तत्व सीधे बीज और मिट्टी के संपर्क क्षेत्र में पहुंचते हैं.
इससे बीज का अंकुरण तेज होता है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधे शुरुआती चरण में अधिक मजबूत बनते हैं.
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद
भारत की कृषि लगातार बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों से प्रभावित हो रही है. सूखा, अनियमित मानसून, अत्यधिक तापमान, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और नए कीटों व रोगों की चुनौतियां किसानों के लिए बड़ी समस्या बन रही हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल उर्वरक और सिंचाई पर्याप्त नहीं हैं. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और मजबूत शुरुआती फसल स्थापना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
Smart Seed Technology इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है ताकि पौधे शुरुआती अवस्था से ही मजबूत बन सकें.
30 प्रतिशत तक बढ़ी पैदावार
ICAR-IIOR द्वारा तेलंगाना में किसानों के खेतों पर किए गए प्रदर्शन परीक्षणों में इस तकनीक के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं.
मूंगफली और सोयाबीन की फसलों में पारंपरिक खेती की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन दर्ज किया गया. इसके अलावा पौधों की वृद्धि, फसल स्थापना और कुल उत्पादकता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
कई फसलों में सफल परीक्षण
Smart Seed Technology का परीक्षण केवल मूंगफली और सोयाबीन तक सीमित नहीं रहा. देशभर में विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं.
AICRP-Seed परीक्षणों के दौरान सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी फसलों में 12 प्रतिशत से 37 प्रतिशत तक उत्पादकता वृद्धि दर्ज की गई.
इससे यह साबित होता है कि तकनीक विभिन्न प्रकार की फसलों और खेती प्रणालियों में उपयोगी हो सकती है.
वर्षा आधारित खेती के लिए वरदान
भारत की बड़ी कृषि भूमि आज भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है. ऐसे क्षेत्रों में मानसून में देरी, नमी की कमी और मौसम संबंधी जोखिम किसानों के लिए गंभीर चुनौती बने रहते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि Smart Seed Technology इन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है क्योंकि यह बीजों को शुरुआती चरण में अतिरिक्त सुरक्षा और पोषण प्रदान करती है.
इससे फसल खराब होने का जोखिम कम हो सकता है और किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सकता है.
एक तकनीक, कई फायदे
पारंपरिक बीज उपचार आमतौर पर किसी एक उद्देश्य के लिए किए जाते हैं, लेकिन ICAR-IIOR की Smart Seed Technology एक समग्र समाधान प्रदान करती है.
इसे अनाज, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, रेशा फसलें, चारा फसलें, सब्जियां, मसाले और बागवानी फसलों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है.
यानी यह तकनीक देश की विविध कृषि प्रणालियों में व्यापक रूप से उपयोग की जा सकती है.
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बीज का अंकुरण बेहतर हो, पौधे मजबूत हों और फसल पर मौसम का प्रभाव कम पड़े तो उत्पादन बढ़ना स्वाभाविक है.
उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में सुधार होगा और खेती की लाभप्रदता भी बढ़ेगी. साथ ही उर्वरकों और अन्य इनपुट के अधिक कुशल उपयोग से लागत में भी कमी आ सकती है.
बड़े स्तर पर अपनाने की तैयारी
ICAR-IIOR अब इस तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए राज्य बीज विकास निगमों, राष्ट्रीय बीज निगम, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), बीज प्रसंस्करण इकाइयों और निजी बीज कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है.
उद्देश्य यह है कि उन्नत गुणवत्ता वाले स्मार्ट बीज किसानों तक बड़े पैमाने पर पहुंच सकें और देश की कृषि प्रणाली को अधिक टिकाऊ तथा जलवायु अनुकूल बनाया जा सके.
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भविष्य की खेती का आधार बन सकती है तकनीक
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कृषि विकास का बड़ा हिस्सा ऐसी तकनीकों पर निर्भर करेगा जो हर कृषि इनपुट को अधिक प्रभावी बना सकें.
Smart Seed Technology इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बीज को केवल रोपण सामग्री नहीं बल्कि पोषण, सुरक्षा और जैविक सहायता से लैस एक उन्नत कृषि तकनीक में बदल देती है.
यदि इसका बड़े स्तर पर उपयोग होता है तो यह भारत की कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु जोखिम कम करने और करोड़ों किसानों की आय सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
स्रोत: Ministry of Agriculture & Farmers Welfare


