भारत ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश की पहली Private Point-in-Space (PinS) Instrument Approach Procedure को मंजूरी मिलने की घोषणा की है. यह प्रणाली आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट पर हेलिकॉप्टर संचालन के लिए विकसित की गई है और इससे खराब मौसम या सीमित दृश्यता की स्थिति में भी सुरक्षित उड़ान और लैंडिंग संभव हो सकेगी.
यह प्रक्रिया भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने विकसित की है, जबकि इसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मंजूरी दी है.
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क्या है PinS Instrument Approach?
PinS (Point-in-Space) एक आधुनिक सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से हेलिकॉप्टर संचालन के लिए तैयार किया गया है.
इस तकनीक की मदद से हेलिकॉप्टर उन हेलीपोर्ट पर भी सुरक्षित तरीके से उतर सकते हैं, जहां पारंपरिक Instrument Landing System (ILS) या अन्य ग्राउंड आधारित नेविगेशन उपकरण उपलब्ध नहीं हैं.
खराब मौसम, कोहरा या कम दृश्यता जैसी परिस्थितियों में भी यह प्रणाली पायलटों को अधिक सटीक मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है.
DGCA और ICAO मानकों के अनुसार तैयार
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार PinS प्रक्रिया को DGCA के नियमों और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है.
इससे भारत का हेलिकॉप्टर संचालन वैश्विक सुरक्षा मानकों के और करीब पहुंच जाएगा.
नागरिक उड्डयन मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत की पहली PinS Instrument Approach Procedure की शुरुआत हेलिकॉप्टर संचालन के लिए एक नए दौर की शुरुआत है.
उन्होंने कहा कि इससे उड़ान सुरक्षा, संचालन की विश्वसनीयता और हर मौसम में हेलीपोर्ट तक पहुंचने की क्षमता बेहतर होगी. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए AAI, DGCA और आंध्र प्रदेश सरकार सहित सभी संबंधित एजेंसियों की सराहना की.
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर देश में हेलिकॉप्टर सेवाओं को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और सुलभ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है.
GAGAN के बाद एक और बड़ी उपलब्धि
मंत्रालय ने बताया कि हाल ही में भारत ने GAGAN आधारित स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक के जरिए एक वाणिज्यिक विमान की सफल Precision Approach का प्रदर्शन किया था.
अब PinS प्रणाली को मंजूरी मिलना भारत की Performance-Based Navigation (PBN) प्रणाली को मजबूत करने और स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन तकनीकों के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
किन क्षेत्रों को होगा फायदा?
सरकार के अनुसार PinS तकनीक का उपयोग भविष्य में देश के कई हिस्सों में किया जा सकेगा. इससे विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है.
- आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं (Air Ambulance)
- आपदा राहत एवं बचाव अभियान
- चारधाम और अन्य धार्मिक पर्यटन
- दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाएं
- ऑफशोर ऑपरेशन
- कॉर्पोरेट एविएशन
- क्षेत्रीय हवाई संपर्क
नई प्रणाली से मौसम के कारण उड़ानों में होने वाली बाधाएं कम होंगी और दूरस्थ क्षेत्रों तक हेलिकॉप्टर सेवाएं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेंगी.
Source: Ministry of Civil Aviation


