Ladakh High Court Bench Inauguration: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने रविवार को लेह के मेलोंगथांग में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की नई लद्दाख बेंच का उद्घाटन किया. इस बेंच के शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को न्याय पाने के लिए श्रीनगर या जम्मू तक लंबी यात्रा करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है.
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इस नई बेंच का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना, यात्रा पर होने वाले खर्च को कम करना और तकनीक के जरिए अदालतों के कामकाज को तेज करना है. उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया.
लद्दाख में न्याय तक पहुंच होगी आसान
लद्दाख का भौगोलिक क्षेत्र काफी दुर्गम है. कई इलाकों से श्रीनगर या जम्मू पहुंचने में लंबा समय लगता है और मौसम तथा सड़क परिस्थितियों के कारण यात्रा भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. ऐसे में लेह में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होने से स्थानीय लोगों, वकीलों और मुकदमों से जुड़े पक्षकारों को सुविधा मिलने की उम्मीद है.
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि लद्दाख बेंच की स्थापना के पीछे न्याय तक लोगों की पहुंच आसान बनाना प्रमुख उद्देश्य रहा है. उन्होंने इसे दुनिया के सबसे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संवैधानिक न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.
पेपरलेस कोर्ट में तकनीक से होगा काम
लद्दाख बेंच को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस किया गया है. इसे पूरी तरह आईटी-सक्षम और पेपरलेस कोर्ट के रूप में विकसित किया गया है. इससे न्यायिक रिकॉर्ड के प्रबंधन और अदालती प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी.
कोर्ट परिसर में डिजिटल सुविधाओं के साथ डिजिटाइजेशन सेंटर, फाइलिंग काउंटर, बार रूम, वादियों के बैठने की जगह, कॉन्फ्रेंस रूम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम भी बनाए गए हैं.
ई-फाइलिंग पोर्टल और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम लॉन्च
सीजेआई सूर्यकांत ने उद्घाटन समारोह के दौरान चार प्रमुख पहलों की शुरुआत की. इनमें पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ग्रीन वॉल पहल के साथ न्यायिक कामकाज को डिजिटल बनाने वाली व्यवस्थाएं शामिल हैं.
इन पहलों से मिलेंगी सुविधाएं
ई-फाइलिंग पोर्टल: वकील और मुकदमे से जुड़े पक्षकार ऑनलाइन केस दाखिल कर सकेंगे. इससे दूरदराज के इलाकों से अदालत आने की जरूरत कम हो सकती है.
- डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (DMS): न्यायिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड का डिजिटल प्रबंधन किया जा सकेगा.
- ऑनलाइन भर्ती पोर्टल: हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने में मदद मिलेगी.
- ग्रीन वॉल पहल: न्यायपालिका की ओर से पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है.
इन पहलों का मकसद न्यायिक प्रक्रिया को तकनीक के जरिए अधिक प्रभावी और नागरिकों के अनुकूल बनाना है.
11 स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने की पहल
न्यायिक बुनियादी ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सीजेआई सूर्यकांत ने 11 स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने का काम भी शुरू कराया. यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और संस्थानों में टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
लद्दाख के पर्यावरणीय महत्व और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सौर ऊर्जा का उपयोग स्थानीय जरूरतों के लिहाज से भी उपयोगी हो सकता है.
उद्घाटन समारोह में कई वरिष्ठ न्यायाधीश और अधिकारी रहे मौजूद
समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली मौजूद रहे. भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.
इसके अलावा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ताशी रबस्तान, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुमार कुंद्रा, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तथा लेह और कारगिल बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने समारोह में हिस्सा लिया.
सीजेआई के पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उन्होंने उद्घाटन पट्टिका का अनावरण किया और कोर्ट परिसर का निरीक्षण किया.
न्याय, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय तक पहुंच आसान बनाने में तकनीक और कानूनी सहायता की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि डिजिटल पहल भौगोलिक दूरी से पैदा होने वाली बाधाओं को दूर करने में मददगार हो सकती हैं.
लद्दाख बेंच की स्थापना और डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत से क्षेत्र में न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में नया अध्याय जुड़ा है. हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ऑनलाइन सेवाएं कितनी प्रभावी ढंग से संचालित होती हैं और दूरदराज के लोगों तक उनकी पहुंच कितनी बढ़ती है.
नई बेंच से उम्मीद है कि लद्दाख के लोगों को न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अदालतों का कामकाज अधिक सुविधाजनक बनेगा.
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