नई दिल्ली: भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना में अब स्वदेशी तकनीक की भूमिका बढ़ने जा रही है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भारत में ही हाई स्पीड ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं. इनका निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के बेंगलुरु स्थित प्लांट में किया जा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य हाई स्पीड रेल तकनीक में देश की घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है.
प्रस्तावित स्वदेशी ट्रेन की डिजाइन स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है. शुरुआती परिचालन में इसकी वास्तविक गति इससे कम हो सकती है. हालांकि, ट्रेन की अंतिम गति और यात्रियों के लिए सेवा शुरू होने की तारीख परीक्षण तथा सुरक्षा मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी.
यह भी पढ़ें- आगरा मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर का ट्रायल को लेकर बड़ा अपडेट, 5 स्टेशनों पर दौड़ेगी मेट्रो
52 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने का दावा
स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन के प्रदर्शन को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह शून्य से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति महज 52 सेकंड में हासिल कर सकती है. इसकी तुलना जापानी शिंकानसेन ट्रेन से भी की जा रही है. हालांकि, अलग-अलग ट्रेनों की गति पकड़ने की क्षमता की तुलना करते समय ट्रेन के मॉडल, भार, तकनीकी विनिर्देश और परीक्षण परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है. स्वदेशी ट्रेन के लिए बताए गए आंकड़ों की पुष्टि अंतिम तकनीकी परीक्षणों से होगी.
जापानी शिंकानसेन के बजाय स्वदेशी तकनीक पर जोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में पहले जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित ट्रेनसेट इस्तेमाल करने की योजना थी. लेकिन स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन विकसित करने पर भी काम आगे बढ़ाया गया है. नई ट्रेन के विकास में वंदे भारत प्लेटफॉर्म की तकनीक को आधार बनाकर उसे हाई स्पीड परिचालन के अनुरूप अपग्रेड करने की योजना है. इसमें स्टेनलेस स्टील बॉडी और हाई स्पीड रेल के लिए जरूरी तकनीकी प्रणालियों पर काम किया जा रहा है. इस पहल से भारत को भविष्य में हाई स्पीड रेल के कोच बनाने, उनका रखरखाव करने और घरेलू स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने में मदद मिल सकती है.
विदेशी कोच से कितनी कम होगी स्वदेशी ट्रेन की कीमत?
स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन को विकसित करने के पीछे लागत कम करना भी एक अहम उद्देश्य है. उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, जापानी शिंकानसेन ट्रेनसेट की कीमत लगभग 460 से 500 करोड़ रुपये तक हो सकती है. उन्नत तकनीक, भूकंपरोधी प्रणाली और भारतीय मौसम के अनुकूल बदलावों के कारण लागत बढ़ने की संभावना भी बताई गई है.
दूसरी ओर, स्वदेशी ट्रेन के एक कोच की लागत करीब 28 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि जापानी कोच की अनुमानित लागत 46 से 48 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है. इन आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय दोनों ट्रेनों के तकनीकी विनिर्देश, उपकरण, रखरखाव और अनुबंध की शर्तों को भी देखना जरूरी है.
BEML और चेन्नई की ICF मिलकर कर रहे काम
स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन के निर्माण में BEML और चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) की भूमिका अहम है. BEML ट्रेन के कोच तैयार कर रही है, जबकि ICF डिजाइन और तकनीकी विकास से जुड़े कार्यों में सहयोग कर रही है.
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, BEML को आठ-आठ कोच वाले दो हाई स्पीड ट्रेनसेट बनाने के लिए करीब 867 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है. परियोजना में आगे ट्रेनसेट की आपूर्ति और रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी.
कब दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन?
स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन का प्रोटोटाइप दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच पेश किए जाने का लक्ष्य बताया गया है. इसके बाद स्पीड ट्रायल और जरूरी सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे. सूरत से दक्षिण गुजरात के अन्य हिस्सों की ओर सीमित दूरी पर परिचालन शुरू करने की योजना भी चर्चा में है. हालांकि, 15 अगस्त 2027 से ट्रेन चलने और सूरत-विलिमोरा या सूरत-वापी के बीच शुरुआती सेवा शुरू होने से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. फिलहाल इसे निर्धारित लक्ष्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित परिचालन तारीख के रूप में.
भविष्य में दूसरे रूट पर भी मिल सकता है फायदा
यदि स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों में सफल रहती है, तो भविष्य में भारत के अन्य प्रस्तावित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भी घरेलू तकनीक विकसित करने का रास्ता खुल सकता है. दिल्ली-वाराणसी, चेन्नई-बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे संभावित रूट पर हाई स्पीड रेल की योजनाओं को लेकर भी चर्चा होती रही है.
यह भी पढ़ें- 300 गैंगस्टर्स के एनकाउंटर की कहानी लाएंगे राम गोपाल वर्मा! ‘Police Company’ में दया नायक बनेंगे हर्षवर्धन राणे


