दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया गया है. इसके तहत निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है. खुले में कचरा जलाने और तंदूर में कोयले व लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक जैसे उपायों को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है.
नोएडा में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से किए गए निरीक्षण में 30 निर्माण स्थलों में से 17 पर नियमों का उल्लंघन पाया गया. इन मामलों में करीब 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है. वहीं, पुस्ता रोड के आसपास संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) और हॉट मिक्स प्लांट पर प्रदूषण फैलाने के मामले में करीब 1.28 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई है.
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दिल्ली-NCR में क्यों लागू किया गया GRAP-1?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद पूरे NCR में GRAP-1 लागू करने का फैसला किया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 21 अक्टूबर को दिल्ली का दैनिक औसत AQI दोपहर 2 बजे 244 और शाम 4 बजे 245 दर्ज किया गया था. यह 201 से 300 के बीच आने वाली खराब वायु गुणवत्ता की श्रेणी है.
GRAP का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने पर चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण के उपाय लागू करना है. पहले चरण में धूल, वाहनों के धुएं, कचरा जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे स्रोतों पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को कार्रवाई करनी होती है.
तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक
GRAP-1 लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की दुकानें चलाने वालों को भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा. तंदूर में ईंधन के रूप में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है. इसके स्थान पर बिजली, गैस या अन्य स्वीकृत स्वच्छ ईंधन आधारित उपकरणों का इस्तेमाल करना होगा. इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर होने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करना है.
इसके अलावा खुले स्थानों पर कूड़ा, प्लास्टिक, सूखे पत्ते और अन्य ठोस कचरा जलाने पर रोक है. संबंधित विभागों को ऐसे मामलों की निगरानी करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
निर्माण स्थलों पर बढ़ी निगरानी, 17 जगहों पर मिली गड़बड़ी
नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर रही हैं. क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर के दौरान अब तक करीब 30 साइटों का निरीक्षण किया गया. इनमें से 17 स्थानों पर प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का उल्लंघन मिला. इन मामलों में लगभग 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है.
निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्थानीय स्रोत है. इसलिए निर्माण सामग्री और मलबे को ढककर रखना, उन्हें ढके हुए वाहनों में ले जाना तथा जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करना महत्वपूर्ण है. बड़े निर्माण और तोड़फोड़ वाले प्रोजेक्ट्स को लागू पंजीकरण और निगरानी संबंधी नियमों का भी पालन करना होता है.
RMC और हॉट मिक्स प्लांट पर भी कार्रवाई
नोएडा के पुस्ता रोड क्षेत्र में संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट और हॉट मिक्स प्लांट भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में हैं. अधिकारियों के अनुसार, इन इकाइयों पर प्रदूषण फैलाने के मामले में करीब 1.28 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी.
इन औद्योगिक इकाइयों में निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन और स्वीकृत ईंधन का इस्तेमाल जरूरी है. यदि इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
सड़कों की धूल कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
नोएडा में खराब सड़कों से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण बढ़ा रही है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, इस समस्या को लेकर प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई है. सड़क की स्थिति सुधारने के लिए पत्राचार भी किया गया है. संबंधित सड़क के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिली है और जल्द निर्माण का आश्वासन दिया गया है. हालांकि, सड़क निर्माण पूरा होने की तारीख की पुष्टि नहीं की गई है.
GRAP-1 के तहत सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और निर्माण या सड़क मरम्मत वाली जगहों पर एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल जैसे उपायों को तेज करने के निर्देश हैं. इनका मकसद हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को कम करना है.
आम लोग प्रदूषण कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं?
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है. लोगों को अपने वाहनों का प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (PUC) वैध रखना चाहिए, रेड लाइट पर इंजन बंद करना चाहिए और संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन या कार-पूलिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए. खुले में कचरा जलाने से बचना और निर्माण का मलबा निर्धारित स्थान पर ही डलवाना भी जरूरी है.
प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधि दिखाई देने पर नागरिक संबंधित सरकारी शिकायत माध्यमों, जैसे SAMEER ऐप या उपलब्ध स्थानीय शिकायत सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं. GRAP-1 का उद्देश्य केवल तत्काल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना भी है. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर अधिकारी आगे के कदमों की समीक्षा करेंगे.
ध्यान दें: GRAP-1 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली-NCR में सभी निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है. निर्माण स्थलों को धूल नियंत्रण और लागू नियमों का पालन करना होगा. उल्लंघन पर कार्रवाई की जा सकती है.
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