Kolkata Durga Puja Stampede: मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए बारिश से बचने की कोशिश एक दर्दनाक हादसे में बदल गई. कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद अब प्रत्यक्षदर्शियों ने उस भयावह मंजर की जानकारी दी है, जब पंडाल में भीड़ बेकाबू हो गई. लगातार बारिश और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को हादसे की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है. वहीं, कोलकाता पुलिस ने पूजा आयोजन समिति के कुछ सदस्यों समेत 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
इस हादसे में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, 19 लोगों की जान गई और 25 लोग घायल हुए. घटना के बाद प्रशासन ने जांच तेज कर दी है, जबकि राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है.
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बारिश से बचने के लिए उमड़ी भीड़, फिर बिगड़ गए हालात
प्रत्यक्षदर्शी विनय कुमार ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि लगातार बारिश के कारण पंडाल में मौजूद लोग बाहर निकलने से बच रहे थे. भीड़ इतनी अधिक हो गई कि उसे संभालना मुश्किल हो गया. उन्होंने कहा कि मौके पर पुलिस प्रशासन मौजूद था, लेकिन अचानक बढ़ी भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सका. बारिश से बचने की कोशिश कर रहे श्रद्धालुओं के बीच हालात बिगड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी उत्तम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे. उनके अनुसार, पुलिसकर्मी और नागरिक स्वयंसेवक राहत कार्य में जुटे थे. स्थानीय विधायक भी घायलों के इलाज और जरूरी व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ है कि भारी भीड़ के बीच सुरक्षित आवाजाही बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया था. हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा.
12 लोग हिरासत में, आयोजकों से भी पूछताछ
भगदड़ के बाद कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक, पूजा आयोजन समिति के कुछ सदस्यों समेत 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. घटनास्थल को जांच के लिए सील कर दिया गया है. फॉरेंसिक टीम, स्पेशल टास्क फोर्स और दमकल विभाग के अधिकारी हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं.
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि भारी भीड़ के बीच सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और बारिश के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने में कहां चूक हुई.
अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और सरकार पर उठाए सवाल
हादसे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है. तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने घटना पर दुख जताते हुए कोलकाता पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की आलोचना की.
उन्होंने सोशल मीडिया पर मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. उनके बयान ने हादसे के बाद प्रशासन की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता घायलों की जान बचाना और राहत-बचाव कार्य पूरा करना है. उन्होंने अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ बढ़ाने की मांग की और कहा कि पार्टी कार्यकर्ता पुलिस तथा प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे हैं.
मृतकों के परिवारों को 25 लाख और सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है. राज्य सरकार के मुताबिक, मृतकों के प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये दिए जाएंगे. प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया गया है. प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये की सहायता मिलेगी. घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी.
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अब सबसे बड़ा सवाल: क्या सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक?
दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता के पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में बारिश, संकरे रास्ते और अचानक बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षित निकास की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. चोरबागान हादसे के बाद अब पुलिस की तैयारियों, आयोजकों की जिम्मेदारी और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. 12 लोगों को हिरासत में लिया जाना जांच की दिशा में एक कदम है, लेकिन हादसे की पूरी तस्वीर सामने आना अभी बाकी है.
बारिश से बचने के लिए उमड़ी भीड़ के बीच आखिर किस मोड़ पर हालात हाथ से निकल गए? इसका जवाब जांच से मिलेगा. फिलहाल, 19 मौतों के बाद सबसे बड़ी जरूरत पीड़ित परिवारों को सहारा देने, घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने की है.


