Sawan Somwar Rules: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान सोमवार के दिन शिवलिंग का अभिषेक और पूजन करने की परंपरा है. उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार 2026 में सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त और दूसरा सोमवार 10 अगस्त को रहा, जबकि तीसरा सावन सोमवार 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार पर श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. पूजा में सामग्री से ज्यादा महत्व श्रद्धा और भाव का माना गया है. आइए जानते हैं वे 7 चीजें, जिन्हें सावन सोमवार की शिव पूजा में अर्पित किया जाता है.
गंगाजल या स्वच्छ जल
भगवान शिव के अभिषेक में जल का विशेष महत्व माना जाता है. सावन सोमवार के दिन सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित किया जा सकता है. जल चढ़ाते समय श्रद्धालु “ॐ नमः शिवाय” का जाप कर सकते हैं.
दूध
शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा काफी प्रचलित है. धार्मिक मान्यता में दूध को शुद्धता और सात्विकता से जोड़कर देखा जाता है. सावन सोमवार पर दूध से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल चढ़ाना भी परंपरागत पूजा विधि का हिस्सा माना जाता है.
बेलपत्र
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है. पूजा में तीन पत्तियों वाले बेलपत्र को विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. बेलपत्र चढ़ाते समय पत्तियों को साफ करके अर्पित करें और ध्यान रखें कि वे खंडित या खराब न हों.
शहद
शिव पूजा में शहद का इस्तेमाल अभिषेक के लिए किया जाता है. धार्मिक परंपराओं में इसे मधुरता और शुभता का प्रतीक माना जाता है. यदि शहद से अभिषेक करें तो बाद में शिवलिंग को स्वच्छ जल से धोना उचित माना जाता है.
दही
दही भी शिवलिंग के अभिषेक में इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक सामग्री है. पंचामृत में भी दही का प्रयोग किया जाता है. सावन सोमवार पर श्रद्धालु दही अर्पित कर भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं.
चंदन
भगवान शिव को चंदन अर्पित करने की परंपरा भी है. चंदन को शीतलता और पवित्रता से जोड़ा जाता है. पूजा के दौरान शिवलिंग पर चंदन का लेप या चंदन का तिलक लगाया जा सकता है.
धतूरा
धतूरा भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली पारंपरिक पूजन सामग्री में शामिल है. शिव पूजा में धतूरा चढ़ाने की धार्मिक परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. इसे साफ करके श्रद्धा के साथ शिवलिंग या भगवान शिव को अर्पित किया जाता है.
सावन सोमवार की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
शिवजी की पूजा करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और स्वच्छता है. पूजा सामग्री साफ होनी चाहिए और शिवलिंग पर कोई भी वस्तु अर्पित करने से पहले स्थानीय मंदिर की परंपरा या पुजारी के निर्देश का पालन करना बेहतर है. धार्मिक मान्यताओं को आस्था के रूप में ही लेना चाहिए.
उत्तर भारत में 2026 का सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक माना जा रहा है और इस दौरान चार सावन सोमवार पड़ रहे हैं. सावन सोमवार पर सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, शिवलिंग का जलाभिषेक करें, बेलपत्र और उपलब्ध पूजन सामग्री अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें.
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की भक्ति करने से मन को शांति मिलती है और भक्त का ध्यान आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ता है. इसलिए पूजा में सामग्री की संख्या से अधिक महत्व सच्ची श्रद्धा, संयम और अच्छे आचरण का माना जाता है.


