Work from Home Shoulder Pain: वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठकर लैपटॉप चलाने से गर्दन, कंधे, पीठ और कमर में दर्द की समस्या बढ़ सकती है. खासकर जब लोग बिस्तर, सोफे, डाइनिंग चेयर या लैपटॉप को गोद में रखकर घंटों काम करते हैं, तो शरीर एक ही मुद्रा में बना रहता है. विशेषज्ञों के मुताबिक काम की जगह को एर्गोनॉमिक तरीके से व्यवस्थित करने और बीच-बीच में शरीर को हिलाने-डुलाने से इस तरह की परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है.
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काम के लिए सही कुर्सी चुनें
घर से काम करते समय बैठने की जगह पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए. कई लोग लंबे समय तक प्लास्टिक की कुर्सी, सोफे या बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं. ऐसी जगहों पर पीठ को पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिलता और व्यक्ति अनजाने में आगे या पीछे झुककर बैठने लगता है.
ऐसी कुर्सी चुनें जिसमें कमर को पर्याप्त सपोर्ट मिले और पैर जमीन पर आराम से टिक सकें. CDC की एर्गोनॉमिक गाइडलाइन के अनुसार बैठते समय पैरों को फर्श पर टिकाना और कमर को उचित सपोर्ट देना उपयोगी है.
लैपटॉप को गोद में रखकर काम न करें
लैपटॉप को गोद में रखकर काम करने पर स्क्रीन अक्सर बहुत नीचे रहती है. इससे गर्दन और कंधों को आगे की ओर झुकाना पड़ता है. लंबे समय तक ऐसी मुद्रा में रहने से गर्दन, कंधे और ऊपरी पीठ पर खिंचाव महसूस हो सकता है.
कोशिश करें कि स्क्रीन आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रहे. अगर संभव हो तो लैपटॉप के साथ अलग कीबोर्ड और माउस का इस्तेमाल करें, ताकि स्क्रीन और हाथों की स्थिति को अलग-अलग आरामदायक तरीके से व्यवस्थित किया जा सके. CDC भी अलग मॉनिटर या बाहरी कीबोर्ड-माउस के इस्तेमाल को उपयोगी विकल्प बताता है.
लगातार एक ही जगह बैठे न रहें
सही कुर्सी पर बैठना ही पर्याप्त नहीं है. कई घंटे तक लगातार बैठे रहना भी शरीर के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. इसलिए काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना जरूरी है.
लगभग 30 से 60 मिनट के अंतराल पर अपनी स्थिति बदलें, उठकर थोड़ा चलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें. Johns Hopkins Medicine भी लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने के बजाय नियमित रूप से उठने और चलने की सलाह देता है.
कंधों और पीठ को लगातार झुकाकर न रखें
काम करते समय कंधों को आगे की तरफ झुकाकर या पीठ को गोल करके बैठने की आदत धीरे-धीरे शरीर पर असर डाल सकती है. खासकर लैपटॉप स्क्रीन देखने के दौरान लोग अनजाने में गर्दन आगे निकाल लेते हैं.
काम करते समय पीठ को सपोर्ट दें, कंधों को सहज रखें और स्क्रीन को ऐसी जगह रखें जहां उसे देखने के लिए लगातार नीचे न झुकना पड़े. सही एर्गोनॉमिक व्यवस्था से गर्दन और पीठ पर पड़ने वाले अनावश्यक तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है.
रोजाना चलने और हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें
अगर आपका काम ज्यादातर बैठकर होता है, तो दिन में कुछ समय चलने और शरीर को सक्रिय रखने के लिए निकालना जरूरी है. सुबह की वॉक, हल्की एक्सरसाइज या काम के बीच छोटी वॉक लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को तोड़ सकती है.
वर्क फ्रॉम होम में शारीरिक गतिविधि के लिए अलग से लंबा समय निकालना संभव न हो तो छोटे-छोटे अंतराल में चलना भी एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है.
दर्द को नजरअंदाज कर सिर्फ पेनकिलर पर निर्भर न रहें
कमर या कंधे में दर्द होने पर तुरंत दर्द की दवा लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता. अगर दर्द बार-बार हो रहा है, लगातार बना रहता है या काम करने की मुद्रा बदलने और आराम के बावजूद सुधार नहीं होता, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.
खास तौर पर हाथ-पैर में सुन्नपन, कमजोरी, झनझनाहट या दर्द के साथ दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षणों में चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है.
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वर्क फ्रॉम होम में छोटी आदतों का रखें ध्यान
घर से काम करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर को लगातार एक ही मुद्रा में न रखें. सही ऊंचाई पर स्क्रीन, कमर को सपोर्ट देने वाली कुर्सी, नियमित ब्रेक और दिनभर में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि आपकी वर्क-रूटीन को ज्यादा आरामदायक बनाने में मदद कर सकती है.


