नई दिल्ली. ब्रिटेन की National Health Service (NHS) घर पर किया जा सकने वाला एक यूरिन टेस्ट ट्रायल कर रही है, जो ब्लैडर कैंसर के 10 में से 9 से ज्यादा मामलों की पहचान कर सकता है. इस टेस्ट से जुड़ी ताजा स्टडी में 92% ब्लैडर कैंसर मामलों की पहचान हुई है. साथ ही निगेटिव रिजल्ट में 99% से ज्यादा संभावना रही कि मरीज को ब्लैडर कैंसर नहीं था.
यह स्टडी European Urology Oncology में प्रकाशित हुई है. इसका नेतृत्व University of Birmingham और diagnostics company Nonacus ने किया. रिसर्च में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के सात अस्पतालों के करीब 1,000 मरीज शामिल हुए.
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यूरिन टेस्ट ने 92% मामलों की पहचान की
NHS के इस परीक्षण में इस्तेमाल किए गए Galleri नहीं, बल्कि Galleys urine test ने ब्लैडर कैंसर के 92% मामलों की पहचान की. टेस्ट का उद्देश्य यूरिन में मौजूद उस genetic material की जांच करना है, जिसे ब्लैडर कैंसर कोशिकाएं छोड़ सकती हैं.
स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों का टेस्ट निगेटिव आया, उनमें 99% से ज्यादा संभावना थी कि उन्हें ब्लैडर कैंसर नहीं है. हालांकि, यह टेस्ट फिलहाल सिस्टोस्कोपी का विकल्प नहीं है.
सिस्टोस्कोपी की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है
ब्लैडर कैंसर की जांच के लिए सिस्टोस्कोपी एक इनवेसिव प्रक्रिया है. इसमें मूत्रमार्ग के रास्ते ब्लैडर के अंदर एक छोटा कैमरा डाला जाता है.
ब्रिटेन में हर साल तीन लाख से ज्यादा सिस्टोस्कोपी की जाती हैं और कुछ इलाकों में मरीजों को इन जांचों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.
रिसर्चर्स को उम्मीद है कि यूरिन टेस्ट की मदद से डॉक्टर ऐसे मरीजों की पहचान कर सकेंगे, जिनमें ब्लैडर कैंसर का जोखिम ज्यादा है. ऐसे मरीजों को सिस्टोस्कोपी के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है, जबकि कम जोखिम वाले मरीजों के मामले में अनावश्यक इनवेसिव जांच कम हो सकती है.
टेस्ट में 23 जीन के 450 से ज्यादा DNA म्यूटेशन की जांच
यह यूरिन टेस्ट ब्लैडर कैंसर से जुड़े genetic material की जांच करता है. इसे मूल रूप से University of Birmingham ने Cancer Research UK की फंडिंग से विकसित किया था.
टेस्ट 23 जीन में ब्लैडर कैंसर से जुड़े 450 से ज्यादा DNA mutations की जांच करता है. इसी genetic information के आधार पर यूरिन सैंपल में कैंसर से जुड़े संकेतों की पहचान करने की कोशिश की जाती है.
एक licensing agreement के तहत इस टेस्ट का commercialization Nonacus ने किया है. कंपनी अपने revenue का एक हिस्सा University of Birmingham और Cancer Research UK को देती है.
करीब 1,000 मरीजों पर हुई स्टडी
इस रिसर्च में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के सात अस्पतालों में करीब 1,000 मरीज शामिल हुए. रिसर्चर्स ने वास्तविक मरीजों में टेस्ट के प्रदर्शन का आकलन किया.
स्टडी के co-author और University of Birmingham के Professor Richard Bryan ने कहा कि इस विज्ञान को विकसित करने और इसकी जांच में कई साल लगे हैं. उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में वास्तविक मरीजों के बीच टेस्ट का शुरुआती प्रदर्शन काफी promising रहा.
Cancer Research UK ने कहा- अभी और रिसर्च जरूरी
Cancer Research UK की Michelle Mitchell ने कहा कि बहुत से लोग ब्लैडर कैंसर के निदान के लिए जरूरी समय से ज्यादा इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए नए तरीके तलाशना जरूरी है.
उन्होंने यह भी कहा कि इस टेस्ट के लिए अभी शुरुआती दौर है और आगे और रिसर्च की जरूरत है. तेज और कम invasive तरीकों की तलाश जारी रखना जरूरी है, ताकि कैंसर का पता लगाने या उसे खारिज करने में मदद मिल सके.
ब्लैडर कैंसर का मुख्य लक्षण क्या है?
दिए गए स्रोत के मुताबिक, ब्लैडर कैंसर 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में ज्यादा आम है. इसका मुख्य लक्षण यूरिन में खून आना बताया गया है.
बीमारी कितनी गंभीर है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना बड़ा है और क्या वह शरीर के किसी दूसरे हिस्से में फैल चुका है. समय पर कैंसर की पहचान और इलाज होने से जान बचाने में मदद मिलती है.
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नई यूरिन टेस्ट तकनीक ऐसे मरीजों की पहचान को तेज और कम invasive बनाने की दिशा में संभावित कदम के रूप में सामने आई है. हालांकि, स्रोत में इसे अभी शुरुआती चरण की तकनीक बताया गया है और बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले आगे की रिसर्च जरूरी है.


