नई दिल्ली. मेडिकल साइंस में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक अहम प्रगति सामने आई है. जनवरी 2026 में Tim Andrews को एक इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट की गई, जबकि इससे पहले जनवरी 2025 में उन्हें जेनेटिकली एडिटेड सूअर की किडनी लगाई गई थी. वह 271 दिनों तक बिना डायलिसिस के उस किडनी के साथ रहे. इसके बाद उन्हें एक डोनर से इंसानी किडनी मिली.
यह मामला खास इसलिए है क्योंकि इसे जीवित इंसान में सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सबसे लंबे समय तक डायलिसिस-मुक्त रहने और फिर इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट तक पहुंचने का पहला documented case बताया गया है. इस अनुभव को xenotransplantation यानी जानवर से इंसान में अंग प्रत्यारोपण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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इस मामले का विवरण 3 सितंबर को The Lancet में प्रकाशित एक पेपर में Harvard Medical School के physician-scientists, Massachusetts General Hospital और उनके सहयोगियों ने दिया.
271 दिनों तक बिना डायलिसिस के काम करती रही सूअर की किडनी
Tim Andrews जब xenotransplantation से गुजरे, तब उनकी उम्र 66 वर्ष थी. उन्हें genetically edited pig kidney लगाई गई थी. पेपर के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया.
Andrews 271 दिनों तक इस किडनी के साथ रहे और इस दौरान उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी. इसके बाद उन्हें एक मृत मानव डोनर से इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट की गई.
इस तरह उनका मामला पहली ऐसी रिपोर्टेड स्थिति बना जिसमें किसी जीवित इंसान में pig kidney xenotransplant के बाद human kidney transplant तक सफलतापूर्वक पहुंचा गया.
शुरुआती rejection को इलाज से किया गया नियंत्रित
जेनेटिकली एडिटेड सूअर की किडनी लगने के बाद Andrews की नियमित निगरानी की गई. डॉक्टरों ने kidney function, rejection, antibody development और संभावित pig-to-human infection पर नजर रखी.
शुरुआती दौर में T-cell-mediated rejection का एक एपिसोड सामने आया. इसे इलाज के जरिए नियंत्रित किया गया. निगरानी के दौरान सूअर से इंसान में किसी pathogen के transmission का सबूत नहीं मिला.
करीब छह महीने बाद एक infection की स्थिति में immunosuppression कम किया गया. इसके बाद transplanted pig kidney में microvascular injury और inflammation विकसित हुई. यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती गई और आखिरकार अंग ने काम करना बंद कर दिया.
इसके बाद मिली इंसानी किडनी
सूअर की किडनी के काम करना बंद करने के बाद Andrews को deceased donor से human kidney मिली. नई इंसानी किडनी ने तुरंत काम करना शुरू किया.
फॉलो-अप के दौरान donor kidney में sensitization का कोई evidence नहीं मिला. शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह अनुभव इस बात को समझने में मदद करता है कि xenotransplantation को human kidney transplant तक एक bridge के रूप में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
यानी ऐसे मरीज, जिन्हें मानव डोनर किडनी के लिए इंतजार करना पड़ता है, भविष्य में xenotransplant के जरिए कुछ समय के लिए डायलिसिस से बच सकें, यह एक संभावित दिशा के रूप में सामने आ रही है.
ऑर्गन की कमी बड़ी चुनौती
Mass General के kidney transplantation medical director और इस पेपर के lead author Leonardo Riella ने कहा कि ऑर्गन shortage ट्रांसप्लांट सिस्टम के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
उनके मुताबिक, end-stage kidney disease वाले मरीजों के लिए transplantation सबसे बेहतर treatment option माना जाता है, लेकिन समय पर transplant के लिए पर्याप्त human organs उपलब्ध नहीं हैं.
यही वजह है कि researchers xenotransplantation को इस कमी को दूर करने की संभावित रणनीति के रूप में देख रहे हैं. शुरुआती लक्ष्य ऐसे मरीजों को human donor kidney मिलने तक dialysis से बाहर रखना हो सकता है.
सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट का इतिहास
जीवित इंसान में genetically engineered pig kidney का पहला xenotransplant 2024 में Massachusetts General Hospital में हुआ था. उस मरीज ने 52 दिनों तक transplanted pig kidney के साथ जीवन बिताया. बाद में cardiac causes से उनकी मृत्यु हुई, जो transplant से संबंधित नहीं थी.
इससे पहले किसी जीवित मरीज में pig kidney xenograft के दो महीने से ज्यादा समय तक टिके रहने, human organ मिलने तक bridge का काम करने या देर से xenograft failure के mechanisms का documentation नहीं हुआ था.
नई रिपोर्ट इस क्षेत्र में पिछले अनुभव की तुलना में लंबे survival की जानकारी देती है.
दूसरी study participant भी human kidney तक पहुंचे
eGenesis ने 3 सितंबर को बताया कि एक दूसरे study participant ने भी xenotransplant से human kidney transplant तक transition किया है.
यह विकास xenotransplantation के संभावित clinical use को लेकर research को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि इस तकनीक को अभी आगे के clinical studies, बेहतर immunosuppression strategies और लंबी अवधि की safety monitoring की जरूरत है.
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microvascular injury से मिली अहम जानकारी
Andrews के मामले में pig kidney में विकसित microvascular injury और inflammation को researchers ने खास तौर पर महत्वपूर्ण माना है.
इससे xenotransplantation में immunosuppressive treatment को बेहतर बनाने, donor pigs की genetic engineering को refine करने और भविष्य के clinical transplantation studies में monitoring strategies विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.
इस पूरे अनुभव से संकेत मिलता है कि xenotransplantation भविष्य में human donor kidney मिलने तक bridge therapy के रूप में भूमिका निभा सकता है. साथ ही, long-term safety और durability साबित होने पर इसे आगे चलकर एक अलग treatment option के रूप में भी विकसित करने की संभावना पर research जारी है.


