Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार आज यानी 4 सितंबर 2026 को देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के इस पावन पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात में कान्हा के जन्म के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा करते हैं. ऐसे में जन्माष्टमी की रात चंद्रमा के निकलने का समय भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है.
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जन्माष्टमी पर चांद को अर्घ्य देने की परंपरा
जन्माष्टमी के व्रत में कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखने के बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होते हैं. पूजा-अर्चना और जन्मोत्सव के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है.
इसी वजह से जन्माष्टमी पर चंद्रमा के उदय का समय जानना जरूरी माना जाता है. खास बात यह है कि चंद्रदर्शन का समय हर शहर में भौगोलिक स्थिति के कारण कुछ अलग रहता है.
दिल्ली में कब होगा चंद्रदर्शन?
दिल्ली में जन्माष्टमी की रात चंद्रमा के उदय को लेकर श्रद्धालुओं की विशेष नजर रहती है. उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार दिल्ली में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की निशीथ पूजा का समय 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर की मध्यरात्रि तक रहेगा. इस दौरान भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा.
गुरुग्राम और हरियाणा में भी रहेगा खास इंतजार
दिल्ली-NCR के साथ गुरुग्राम और हरियाणा में भी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. पंचांग आधारित जानकारी में गुरुग्राम के लिए निशीथ पूजा का समय लगभग 11:58 PM से 12:44 AM तक बताया गया है. यानी भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के लिए मध्यरात्रि का समय विशेष रहेगा.
जयपुर में मध्यरात्रि के बाद पूजा का शुभ समय
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी जन्माष्टमी पर मंदिरों और घरों में विशेष पूजा होगी. उपलब्ध पंचांग के अनुसार जयपुर में निशीथ पूजा का समय लगभग 12:03 AM से 12:49 AM तक है. यानी यहां निशीथ काल 5 सितंबर की शुरुआत में पड़ेगा.
मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का अलग ही रंग
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और बाल लीलाओं से जुड़ी वृंदावन नगरी में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष महत्व रखता है. यहां मंदिरों में मध्यरात्रि के समय भगवान के जन्मोत्सव के आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. 2026 में भी मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह है.
चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत खोलें?
जन्माष्टमी व्रत खोलने के नियम परंपरा और मान्यता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. कई श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं, जबकि पंचांग आधारित वैष्णव परंपराओं में पारण के लिए तिथि और नक्षत्र की स्थिति भी देखी जाती है. इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र की मान्य परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करना चाहिए.
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इस बार जन्माष्टमी पर चंद्रदर्शन के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह है. अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के उदय का समय अलग होने के कारण स्थानीय समय देखकर ही चंद्रमा को अर्घ्य देना उचित रहेगा.


