Delhi, August 24: बच्चों के बढ़ते screen time को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आजकल बच्चे मोबाइल और दूसरे electronic devices में ज्यादा समय बिता रहे हैं. ऐसे में बच्चों के लिए physical activity और खेल बेहद जरूरी हैं.
सुप्रीम कोर्ट खेलों को बच्चों के विकास और शिक्षा का जरूरी हिस्सा बनाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था. मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त Amicus Curiae ने भी स्कूलों में physical activity को जरूरी बनाने की बात कही.
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बच्चों को मोबाइल से ज्यादा खेलों से जोड़ने पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों में मोबाइल और electronic devices के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र किया. कोर्ट की टिप्पणी से यह संकेत मिला कि बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी में physical activity को ज्यादा जगह देने की जरूरत है.
बच्चों के लिए खेल और outdoor activities सिर्फ fitness के लिए ही नहीं, बल्कि उनके overall development के लिए भी अहम माने जाते हैं.
स्कूलों में Physical Activity जरूरी करने की मांग
मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त Amicus Curiae ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हर स्कूल में physical activity अनिवार्य होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी.
खेलों को Fundamental Right बनाने की मांग
यह मामला खेलों को भारतीय संविधान के Part 3, Article 21A के तहत मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग से जुड़ा है.
याचिका ‘Sports: A Way of Life’ NGO के अध्यक्ष और sports researcher डॉ. कनिष्का पांडे ने दाखिल की है.
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से शिक्षा और खेलों के बीच भेदभाव नहीं करने की मांग की गई है.
Nursery से PG तक Sports को जरूरी बनाने की मांग
याचिका में कहा गया है कि खेलों को school curriculum का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए. यह व्यवस्था नर्सरी से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर तक लागू करने की मांग की गई है.
इसके अलावा स्कूलों के budget में sports activities के लिए एक निश्चित हिस्सा तय करने की भी मांग की गई है.
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को notice जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था.
ज्यादा Screen Time से बच्चों पर पड़ सकता है असर
मोबाइल, टीवी और tablet जैसे devices पर लंबे समय तक समय बिताने को लेकर health experts भी बच्चों के लिए balanced routine की सलाह देते रहे हैं.
ज्यादा screen time बच्चों की physical activity को कम कर सकता है. साथ ही बच्चों के mental, physical और language development पर भी इसका असर पड़ने की चिंता जताई जाती रही है.
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विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे बच्चों के लिए screen exposure को खास तौर पर सीमित रखना जरूरी है. 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए screen time से बचने की सलाह दी जाती है, जबकि बड़े बच्चों के लिए भी screen use को सीमित रखना जरूरी माना जाता है.
सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद स्कूलों में sports और physical activity को ज्यादा महत्व देने की बहस एक बार फिर सामने आई है. मामले में अब 22 सितंबर की सुनवाई पर कोर्ट के अगले रुख पर नजर रहेगी.


