ग्रेटर नोएडा के विकास से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाओं को अब जमीन मिलने की प्रक्रिया तेज होती नजर आ रही है. लंबे समय से प्रतीक्षित मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLH) के लिए जमीन की अड़चनें अब दूर होने लगी हैं. इन परियोजनाओं को लेकर प्राधिकरण ने जमीन की सीधी खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
मुआवजा दरों में बढ़ोतरी के बाद अब प्राधिकरण की टीमें सीधे गांवों में पहुंचकर किसानों से बातचीत करेंगी. जमीन खरीद की प्रक्रिया आपसी सहमति के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी और बैनामा कराया जाएगा. इसके लिए संबंधित गांवों में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, ताकि किसानों के साथ बातचीत और कागजी कार्रवाई को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके.
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गांवों में लगाए जा रहे हैं विशेष कैंप
जमीन खरीद की प्रक्रिया के तहत अलग-अलग गांवों में प्राधिकरण की टीमें पहुंचेंगी. तय शेड्यूल के अनुसार पहली टीम 16, 17 और 18 सितंबर को बील अकबरपुर, चमरावली रामगढ़ और चिटेहरा गांव में कैंप लगाएगी.
इन कैंपों का उद्देश्य किसानों से सीधे संवाद करना और जमीन से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है. प्राधिकरण की टीमें गांव में पहुंचकर किसानों के साथ बातचीत करेंगी. आपसी सहमति के बाद जमीन की खरीद और बैनामा संबंधी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए गांवों में ही विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं. इससे संबंधित किसानों को अपनी जमीन और खरीद प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर मौके पर अधिकारियों से बातचीत करने का अवसर मिलेगा.
इन गांवों में भी पहुंचेगी दूसरी टीम
जमीन खरीद के लिए दूसरी टीम भी कई गांवों में कैंप लगाएगी. यह टीम 16, 17, 18 और 21 सितंबर को दतावली, हजरतपुर, चमरावली बोड़ाकी और पल्ला गांव में किसानों से वार्ता करेगी.
इन कैंपों में किसानों से बातचीत के साथ कागजी कार्रवाई पूरी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी. मौके पर प्रशासनिक और प्राधिकरण के अधिकारी मौजूद रहेंगे. इससे जमीन खरीद से जुड़े जरूरी कामों को संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में पूरा करने की कोशिश की जाएगी.
MMTH और MMLH से मजबूत होगा लॉजिस्टिक ढांचा
मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब को ग्रेटर नोएडा की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के तौर पर देखा जा रहा है. इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स के धरातल पर आने से दिल्ली-NCR के परिवहन और लॉजिस्टिक ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलने की बात कही गई है.
लॉजिस्टिक हब के विकसित होने से वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े सेक्टरों में निवेश आने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
स्थानीय युवाओं के लिए बन सकते हैं रोजगार के अवसर
परियोजना से जुड़े विकास के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है. वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में निवेश बढ़ने की स्थिति में इन क्षेत्रों से जुड़े कामों के लिए रोजगार की संभावनाएं बन सकती हैं.
इस तरह इन दोनों परियोजनाओं का असर केवल परिवहन और लॉजिस्टिक ढांचे तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
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किसानों के सहयोग से आगे बढ़ेगा निर्माण
प्राधिकरण का कहना है कि किसानों के सहयोग से जमीन मिलते ही दोनों परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेज


