Lifestyle Digital Desk: बच्चे का खाना कम कर देना या सब्जी-दाल देखकर मुंह फेर लेना देखकर माता-पिता अक्सर परेशान हो जाते हैं. कई बार इसी चिंता में वे बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाने लगते हैं. कुछ माता-पिता निवाला मुंह में डालकर उसे निगलने के लिए कहते हैं, तो कुछ बच्चे को प्लेट पूरी खत्म करने के लिए मजबूर करते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना सही है? विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक बच्चे को भूख और पेट भरने के संकेत समझने देना जरूरी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO भी responsive feeding की सलाह देता है, जिसमें बच्चे की भूख और पेट भरने के संकेतों को समझते हुए खाना खिलाने और प्रोत्साहित करने की बात कही गई है, लेकिन जबरदस्ती करने से बचने को कहा गया है.
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जबरदस्ती खाना खिलाने से क्या परेशानी हो सकती है?
सबसे पहली समस्या यह है कि बच्चा अपने शरीर के प्राकृतिक hunger और fullness signals को समझने में पीछे रह सकता है. सामान्य तौर पर बच्चा भूख लगने पर खाने की इच्छा दिखाता है और पेट भरने पर खाना कम या बंद कर सकता है. अगर हर बार उसे प्लेट पूरी करने या ज्यादा खाने के लिए दबाव दिया जाए, तो खाने की मात्रा तय करने की उसकी प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है. WHO की responsive feeding guidance का उद्देश्य बच्चे को उसकी भूख और तृप्ति के संकेतों के अनुसार खाने में मदद करना है.
खाने का समय तनाव वाला बन सकता है
अगर रोज खाने की टेबल पर बच्चे को डांट, धमकी या दबाव का सामना करना पड़े, तो उसके मन में खाने को लेकर नकारात्मक भावना बन सकती है. खाना परिवार के साथ बातचीत और सीखने का समय भी है. WHO बच्चों को धीरे-धीरे और धैर्य से खाना खिलाने तथा खाने के दौरान बच्चे से बातचीत और eye contact रखने की सलाह देता है.
बच्चा नई चीजें खाने से और दूर हो सकता है
छोटे बच्चों में कुछ खाद्य पदार्थों को पसंद न करना या नए खाने को तुरंत स्वीकार न करना आम बात है. American Academy of Pediatrics के HealthyChildren.org के अनुसार खासकर 2 से 4 साल की उम्र में picky eating आम हो सकती है. ऐसी स्थिति में खाने को लेकर लगातार संघर्ष करने के बजाय शांत माहौल रखना और अलग-अलग पौष्टिक चीजें उपलब्ध कराना बेहतर तरीका माना जाता है.
बच्चे को खाना खिलाने का सही तरीका क्या है?
बच्चे को खाना खिलाते समय माता-पिता का काम केवल यह देखना नहीं होना चाहिए कि प्लेट कितनी खाली हुई. बेहतर तरीका यह है कि बच्चे को पौष्टिक और उम्र के अनुसार उपयुक्त खाना दिया जाए और उसे अपनी भूख के हिसाब से खाने का मौका मिले. बच्चा कम खाए तो तुरंत डांटने या दबाव डालने के बजाय अगली meal या snack के समय फिर पौष्टिक विकल्प दिया जा सकता है. WHO भी बच्चे को खाने के लिए encourage करने, लेकिन force न करने की सलाह देता है.
खाने को लेकर बच्चे से कैसे बात करें?
“इतना तो खाना ही पड़ेगा”, “प्लेट पूरी खत्म करो” या “नहीं खाया तो टीवी नहीं मिलेगा” जैसे दबाव वाले वाक्यों की जगह बच्चे को शांत तरीके से खाने के लिए प्रोत्साहित करें. परिवार के दूसरे सदस्य भी स्वस्थ भोजन खाएं, क्योंकि बच्चे अक्सर बड़ों को देखकर खाने की आदतें सीखते हैं. AAP भी family meals और माता-पिता द्वारा healthy eating का उदाहरण पेश करने को उपयोगी रणनीति मानता है.
अगर बच्चा लगातार खाना न खाए तो?
कभी-कभी बच्चे का कम खाना सामान्य व्यवहार हो सकता है, लेकिन अगर बच्चा लंबे समय तक बहुत कम खा रहा है, कई तरह के खाद्य पदार्थ बिल्कुल नहीं ले रहा, वजन या विकास को लेकर चिंता है, बार-बार खाना निगलने में परेशानी होती है या बच्चा कमजोरी जैसे लक्षण दिखाता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है. हर बच्चे की जरूरत उसकी उम्र, विकास, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है.
माता-पिता रखें ये आसान नियम
बच्चे को भूख लगने पर खाने का अवसर दें. खाने के लिए प्यार से encourage करें लेकिन जबरदस्ती न करें. छोटी मात्रा से शुरुआत करें और जरूरत के अनुसार दोबारा दें. बच्चे को उम्र के अनुसार अलग-अलग स्वाद और textures के पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएं. खाने के समय डांट और तनाव से बचें. सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे के लिए भोजन को सजा या संघर्ष का कारण न बनाएं.
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बच्चे का खाना केवल पेट भरने का मामला नहीं है, बल्कि यह उसकी खाने की आदतों और भोजन के साथ संबंध बनाने की प्रक्रिया भी है. इसलिए बच्चे को जबरन खिलाने के बजाय उसकी भूख और पेट भरने के संकेतों को समझना ज्यादा बेहतर तरीका है. अगर बच्चा सामान्य रूप से बढ़ रहा है और सक्रिय है, तो हर meal में ज्यादा खाना जरूरी नहीं होता. लेकिन लगातार कम खाने या विकास से जुड़ी चिंता होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सही कदम है.
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की infant and young child feeding तथा responsive feeding guidance और American Academy of Pediatrics के HealthyChildren.org की picky eating guidance.
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है. बच्चे की व्यक्तिगत पोषण या स्वास्थ्य समस्या के लिए बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लें.


