Jantar Mantar Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराने और देशभक्ति के नारे लगाने को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) के दो कार्यकर्ताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का मामला गरमा गया है. इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे असहमति की आवाज दबाने की कोशिश बताया है.
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संजय सिंह ने PM मोदी को दी चेतावनी
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तिरंगे का विरोध करने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर तिरंगा फहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने पर युवाओं को जेल क्यों भेजा गया?
संजय सिंह ने लिखा, “मोदी जी, क्या आप अंग्रेज हैं? क्या भारत में अंग्रेजों का शासन है?” उन्होंने RSS मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराए जाने का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार देशभक्ति के नारे लगाने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. AAP सांसद ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं से उलझना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक, युवा जल्द ही इस तानाशाही का अंत कर देंगे.
CJP संस्थापक बोले- हिम्मत है तो इमरजेंसी घोषित कीजिए
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने एक्स पर लिखा कि दोनों का कसूर जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना था. दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार असहमति की आवाज को दबाने के लिए इतनी दृढ़ है, तो उसे कथित तौर पर ऐसी कार्रवाई करने के बजाय आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाना चाहिए.
तिरंगा लहराने और नारे लगाने का लगाया आरोप
CJP कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि उन्हें, सौरव दास और अशुतोष रांका को तिरंगा लहराने तथा ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के कारण हिरासत में लिया गया. शिंदे के मुताबिक, वे CJP के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर की ओर गए थे और वहां राष्ट्रीय ध्वज लहराया था. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद मोदी-शाह सरकार ने अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
हालांकि, पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तीनों कार्यकर्ताओं को मंगलवार को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने की कोशिश के मामले में हिरासत में लिया गया था.
प्रदर्शन स्थल को लेकर भी बढ़ा विवाद
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अधिकारियों ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने का फैसला वापस ले लिया था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में केस भी दर्ज किया गया है. इससे पहले CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं को कई घंटों तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और शुरुआत में उन्हें हिरासत में लिए जाने के कारणों की जानकारी भी नहीं दी गई. उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ताओं को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है.
CJP और विपक्ष का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन
दरअसल, CJP और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. यह विरोध विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जा रहा है. अब जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रूप से और गरमा गया है. एक ओर विपक्षी नेता इसे युवाओं की आवाज दबाने से जोड़ रहे हैं, वहीं पुलिस के अनुसार कार्रवाई जंतर-मंतर में कथित अनधिकृत प्रवेश के मामले में की गई. ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.
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