Ghaziabad Elevated Road Project: गाजियाबाद के लालकुआं और आसपास के इलाकों में रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए नई कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. योजना परवान चढ़ती है तो एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर के जरिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नोएडा तक आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है. हालांकि, अभी परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और तकनीकी जांच के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी.
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भाटिया मोड़ से बनेगी 3 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड?
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने सोमवार को प्रस्तावित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान यातायात के दबाव को कम करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा हुई. जीडीए अधिकारियों के अनुसार, भाटिया मोड़ से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक करीब तीन किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है. इसके बनने से इस मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.
मौजूदा फ्लाईओवर को चार लेन करने की भी तैयारी
योजना में ठाकुरद्वारा के मौजूदा फ्लाईओवर को करीब एक किलोमीटर तक चार लेन का बनाकर भाटिया मोड़ से जोड़ने की संभावना भी शामिल है. इसके अलावा, रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के आगे डबल डेकर फ्लाईओवर के जरिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के ऊपर से नोएडा तक कनेक्टिविटी विकसित करने की परिकल्पना पर भी चर्चा की गई. अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और निर्माण पूरा होता है, तो लालकुआं के आसपास यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ दिल्ली-NCR के बीच आवागमन के विकल्पों में भी विस्तार हो सकता है.
अभी कई बाधाएं, मंजूरी और बजट पर फैसला बाकी
फिलहाल परियोजना शुरुआती पड़ाव पर है. अधिकारियों ने मार्गों का निरीक्षण कर तकनीकी व्यवहार्यता और निर्माण में आने वाली संभावित बाधाओं का आकलन किया है. बिजली विभाग, यूपीसीडा, एनएचएआई और अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित दूसरे तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी. जीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. अभी परियोजना का बजट, अंतिम डिजाइन, टेंडर और निर्माण शुरू होने की समयसीमा निर्धारित नहीं हुई है.
निरीक्षण के दौरान जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्र, प्रभारी मुख्य अभियंता आलोक रंजन और एनएचएआई के अधिकारी मौजूद रहे. अब सबकी नजरें अगली बैठक पर हैं. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो लालकुआं के जाम से परेशान वाहन चालकों को भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है. लेकिन फिलहाल इसे स्वीकृत परियोजना नहीं, बल्कि विचाराधीन कनेक्टिविटी योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
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