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Author: Anusa
अनुषा पिछले 3 वर्षों से Readmeloud.com में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. हेल्थ, यूटिलिटी, टेक और ट्रैवल जैसे विषयों पर रिसर्च-बेस्ड और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करना उनकी विशेषज्ञता है. अनुषा को मीडिया इंडस्ट्री में 5 साल का अनुभव है. उन्होंने करियर की शुरुआत रिपोर्टिंग से की और लोकल प्रिंट मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कदम रखा. ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ काम कर चुकी अनुषा को डिजिटल न्यूज़ और स्टोरीटेलिंग में मजबूत पकड़ हासिल है.
‘ऊं सुभद्राय नम:’ यह वह मंत्र है जिसका जाप करते ही जिंदगी के न जाने कितने ही दुख खत्म हो जाते हैं. मां तुलसी का यह मंत्र जिता प्रभावशाली है, उता ही ज्यादा प्रभावशाली तुलती का पौधा होता है. कहते हैं कि जिस घर में तुलसी का पौध होता है, उस घर में खुशियों का अंबार लगा होता है. दुख-दरिद्र कभी निकट नहीं आते हैं.माना जाता है कि घर में तुलसी का पौधा लगने से और हर रोज पूजा-अर्चना करने से मां लक्ष्मी की कृपा होती है. घर-परिवार में सुख-समृद्धि का माहौल बना रहता है. बता दें कि हिंदू धर्म…
अरे वाह…तुम्हारे पास आईफोन है… ओह माय गॉड…उसने ज़ारा के कपड़े पहने हैं… अरे उसने आज नाइकी के 15 हजार के जूते खरीदे…और तुम्हारे पास क्या है… ये सवाल जितने ही बड़े हैं, उनके जवाब उतने ही कठिन होंगे.ये महंगे कपड़े, महंगी घड़ियां, महंगे जूते, ये स्टार बक्स वाली कॉफी हर किसी के लिए आजकल स्टेटस सिंबल बन गए हैं. यूथ जाते हैं इन जगहों पर शायद सिर्फ अपने फ्रेंड्स के बीच कूल बनने के लिए. हां, यकीन नहीं होता तो जरा हफ्ते-हफ्ते में नाइट क्लब और स्टार बक्स जैसी जगहों पर जाने वाले लोगों के सिर पर हाथ रखकर…
लगाव… ये शब्द सुनते ही शायद आपको आपके दिल के सबसे करीब रहने वाले शख्स की याद आ जाती होगी पर मेरे साथ ऐसा नहीं है. मुझे चहेते शख्स नहीं बल्कि उस बेजुबान की याद आती है, जिसने उन दिनों में मेरा साथ दिया, मेरा सहारा बना, जब पूरी दुनिया कोरोना के डर से अपने घरों में दुबकी हुई थी.अब आप सोच रहे होंगे कि भला कोरोना महामारी के समय एक कबूतर किसी का सहारा कैसे बन सकता है? तो चलिए बताते हैं आपको उस कबूतर… नहीं-नहीं लाल आंखों वाले कबूतर की कहानी.बात साल 2020 की है. मार्च 2020 तक…
सुनो न… वो पापा की परी समझदार हो गई है,जो घंटों मायके में सोया करती थी,वो जल्दी उठने वाले लोगों में शुमार हो गई है,हां, पापा की परी समझदार हो गई है…. मां हाथों में चाय की प्याली लिए खड़ी जगाती रहती थी,दादा-दादी के ताने सुनकर बेचारी सहम भी जाया करती थी,आलस की आदत उसके लिए गुनहगार हो गई है,हां, पापा की परी अब समझदार हो गई है…. चाचू देखते थे उसके नखरे,घरों में मिलकर दोनों रखते थे सारे सामान बिखरे-बिखरेबुआ अक्सर उसे मेला ले जाया करती थी,आज अपने ही घर में रिश्तेदार हो गई है,हां, पापा की परी अब…

