Browsing: कविता
बरगी डैम की लहरों में जब, मौत का साया आया था,एक मां ने अपनी जान से बढ़कर, ममता को अपनाया…
आसां नहीं होता किसी मासूम को रोते छोड़कर आना,आसां नहीं होता उन नन्हीं उंगलियों से अपनी उंगली छुड़ाना.कहते को आ…
रेत के सन्नाटे में जो हरियाली बन जाए,तपती धरती पर जो जीवन की छाया लाए.आxधी-तूफ़ानों से जो अडिग खड़ी रह…
फिर एक फरवरी आई है,टीवी पर वही पुराना सीन,फाइलें खुलीं, कैमरे चमके,मिडिल क्लास फिर रह गया मीन. कुर्सी पर बैठा…
जब संसार शोर बन जाए,और मन प्रश्नों से भर जाए,जब भीतर का दीपक कांपने लगे,तब एक नाम है जो मौन…
मां… तू केवल एक शब्द नहीं,मेरे जीवन का सबसे बड़ा अर्थ है.तेरे बिना यह संसार अधूरा है,तेरे बिना तो मेरी…
दीप जले जब आंगन-आंगन,अंधियारा सब भागे.मन के कोने रोशन हो जाएं,नई उमंगें जागें… धूल मिटे हर कोने-कोने,खुशबू फैले फूलों की.रात…
सजनी बनकर आज खड़ी हूं,चांद से पहले तेरा दीदार चाहूं.करवा चौथ का ये व्रत मैंने रखा,तेरी लंबी उम्र की दुआ…
आज जलेगा रावण का पुतला,बुराई का होगा अंत.सत्य और धर्म की ज्योति से,जीवन पाएगा नया रंग… अहंकार चाहे जितना बड़ा…
ढोल-नगाड़े गूंज रहे हैं,आया मां का शुभ त्योहार.भक्ति की ज्योति जल उठी है,हर दिल में उमंग अपार.. सज गए पंडाल,…

