वाराणसी से रांची होते हुए कोलकाता जाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में सफर आसान होने की उम्मीद है. वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे बनने के बाद करीब 672 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 6 घंटे लगने का अनुमान है. फिलहाल इस यात्रा में 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं. छह लेन का यह एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है.
इस परियोजना से यात्रियों के साथ व्यापारियों और माल ढुलाई से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. यात्रा का समय कम होने से कारोबार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक यात्रा समय सड़क के पूरा होने, यातायात और यात्रा की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
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672 किलोमीटर लंबा होगा वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे
भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे इस एक्सप्रेसवे की प्रगति और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी एनएचएआई के औरंगाबाद परियोजना निदेशक देवेंद्र कुमार बंसल ने दी. शुक्रवार को गया जिले के इमामगंज क्षेत्र के बतेसा स्थित परियोजना कैंप में आयोजित मीडिया टूर के दौरान उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे का लगभग 161 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा.
करीब 672 किलोमीटर लंबी यह सड़क चार राज्यों के बीच आवागमन को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को मौजूदा मार्गों की तुलना में समय बचने की उम्मीद है.
इसका लाभ खास तौर पर व्यापारिक वाहनों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबारियों को मिल सकता है. सड़क संपर्क बेहतर होने से सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है.
गया में 1,248 करोड़ रुपये से हो रहा निर्माण
गया जिले में एक्सप्रेसवे के 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण 1,248.37 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है. परियोजना निदेशक के अनुसार, इस हिस्से का लगभग 35 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.
इस हिस्से का निर्माण जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कर रही है. इसे दिसंबर 2027 के अंत तक पूरा किए जाने की संभावना जताई गई है.
निर्माण कार्यों की प्रगति देखने पहुंचे मीडिया प्रतिनिधियों को चपड़ी गांव के पास परियोजना स्थल का भ्रमण भी कराया गया. अधिकारियों ने बताया कि सड़क की ढलाई तीन परतों में की जा रही है. इसका उद्देश्य सड़क की मजबूती और टिकाऊपन को बेहतर बनाना है.
12 पुल और 8 फ्लाईओवर से आसान होगा आवागमन
एक्सप्रेसवे के गया जिले वाले हिस्से में यातायात को सुचारु बनाने और स्थानीय आवाजाही की सुविधा के लिए कई संरचनाएं प्रस्तावित हैं. इनमें पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास शामिल हैं.
इस हिस्से की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं.
- 12 पुल: इनमें तीन बड़े और नौ छोटे पुल शामिल हैं.
- 8 फ्लाईओवर: यातायात को सुचारु बनाने के लिए.
- 19 वाहन अंडरपास: स्थानीय लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए.
- एक इंटरचेंज और एक टोल प्लाजा: एक्सप्रेसवे पर प्रवेश, निकास और टोल व्यवस्था के लिए.
- दो रेस्ट एरिया: यात्रियों के ठहरने और आराम करने के लिए.
- दो हाथी अंडरपास और दो एनिमल ओवरपास: वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए.
इन सुविधाओं का उद्देश्य केवल तेज यात्रा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और स्थानीय संपर्क को भी बेहतर बनाना है.
सड़क किनारे लगाए जाएंगे करीब 50 हजार पौधे
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है. गया जिले में एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 50 हजार पौधे लगाने का प्रस्ताव है. इसके लिए वन विभाग और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के सहयोग से योजना तैयार की गई है.
अधिकारियों के अनुसार, इस काम के लिए एनएचएआई ने वन विभाग को लगभग 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं. इसके अलावा, वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए हाथी अंडरपास और एनिमल ओवरपास बनाने का प्रावधान किया गया है.
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सड़क निर्माण के साथ वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखना भी है.
कब तक पूरा होगा एक्सप्रेसवे का निर्माण?
एनएचएआई ने वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. वहीं, गया जिले के 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से को दिसंबर 2027 के अंत तक पूरा किए जाने की संभावना जताई गई है.
पूरी परियोजना तैयार होने के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. इससे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है और कारोबारियों को माल ढुलाई में सुविधा मिल सकती है. निर्माण कार्य के दौरान भी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.
फिलहाल गया जिले में निर्माण कार्य जारी है. परियोजना पूरी होने के बाद वाराणसी से रांची होते हुए कोलकाता जाने वाले यात्रियों को कितना समय बचेगा, यह वास्तविक सड़क परिस्थितियों और यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करेगा.
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