प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत देश में अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास और विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, अब तक देशभर के 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है. वहीं, योजना के तहत विद्यार्थियों के लिए 785 छात्रावासों का निर्माण भी पूरा हो गया है.
मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, आदर्श ग्राम योजना के तहत देशभर में 47,200 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है. इस पहल से 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिल रहा है. योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी) बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी कमियों को दूर करना है, ताकि इन गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके.
यह भी पढ़ें- त्योहारों की ऑनलाइन सेल में सावधान! फर्जी डिस्काउंट और वेबसाइट से हो सकती है साइबर ठगी, ऐसे बचाएं अपना पैसा
पीएम-अजय योजना के तहत कितने विकास कार्य पूरे हुए?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी बयान में बताया कि योजना के तहत अब तक कुल 46,944 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं. इसके अलावा, 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं.
ग्राम विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों में मौजूद बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कमियों की पहचान कर विकास कार्यों की दिशा तय की जाती है. योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में आवश्यक सेवाओं और आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाना है, जिससे वहां रहने वाले लोगों की न्यूनतम जरूरतें पूरी हो सकें.
क्या है आदर्श ग्राम की परिकल्पना?
पीएम-अजय योजना के तहत आदर्श ग्राम का उद्देश्य ऐसे गांवों का विकास करना है, जहां लोगों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों. इसके साथ ही सभी वर्गों की न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने और सामाजिक असमानता को यथासंभव कम करने पर जोर दिया जाता है.
इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति बहुल गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और वहां बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है. मंत्रालय के अनुसार, अब तक 47,200 से अधिक गांवों को योजना के दायरे में शामिल किया जा चुका है.
योजना के तीन प्रमुख घटक
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तीन प्रमुख घटक हैं.
- आदर्श ग्राम का विकास: अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी कमियों को दूर करना.
- सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान: राज्य और जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित परियोजनाओं को सहायता देना.
- छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत: विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत करना.
इन घटकों के माध्यम से गांवों के विकास के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है.
सितंबर 2026 तक 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा
मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2026 तक पीएम-अजय योजना के तहत 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका था. छात्रावासों के माध्यम से विद्यार्थियों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है.
वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने दो छात्रावास परियोजनाओं के संबंध में 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है. इन परियोजनाओं में एक छात्रावास लड़कियों के लिए और दूसरा लड़कों के लिए होगा.
दोनों छात्रावासों में कुल 264 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी. यह सहायता छात्रावास संबंधी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में आवंटित की गई है.
योजना की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप और पोर्टल शुरू
पीएम-अजय योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए मंत्रालय ने मोबाइल एप्लिकेशन और पोर्टल भी शुरू किया है. इसके जरिए कागज आधारित प्रक्रियाओं को डिजिटल व्यवस्था में बदलने की दिशा में कदम उठाया गया है.
मंत्रालय के मुताबिक, डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य योजना से जुड़े कार्यों का ऑनलाइन निपटान और वास्तविक समय में निगरानी करना है. इससे योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने में मदद मिलेगी.
पीएम-अजय योजना के तहत गांवों के विकास, सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं और छात्रावास सुविधाओं पर काम किया जा रहा है. मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े योजना के तहत अब तक पूरे हुए विकास कार्यों, घोषित आदर्श ग्रामों और निर्मित छात्रावासों की स्थिति को दर्शाते हैं.
यह भी पढ़ें- कैंसर की 137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगाम, 9 नवंबर से लागू होंगी संशोधित कीमतें


