नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है. इस फैसले के बाद NIIF में केंद्र सरकार की कुल प्रतिबद्धता बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये हो गई है. सरकार का उद्देश्य देश में आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में निवेश को गति देना और संस्थागत पूंजी को आकर्षित करना है.
कैबिनेट ने दी अतिरिक्त निवेश की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में NIIF में 30 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि निवेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह निवेश देश में दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा देने और रणनीतिक क्षेत्रों में पूंजी निवेश को मजबूत करने में मदद करेगा.
बनेगा नया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड
सरकार की ओर से मिली अतिरिक्त राशि का उपयोग NIIF के दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित फंड की स्थापना में किया जाएगा. यह फंड NIIF के पहले प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का उत्तराधिकारी होगा और बड़े पैमाने पर नई परियोजनाओं में निवेश करेगा.
इन क्षेत्रों में होगा निवेश
प्रस्तावित NIIF Infrastructure Fund II का लक्ष्य लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का कोष तैयार करना है. इस फंड के माध्यम से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी अवसंरचना और ई-मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा.
इसके अलावा यह राशि NIIF की नई निवेश रणनीतियों और द्विपक्षीय एवं अन्य रणनीतिक फंडों को भी सहयोग प्रदान करेगी.
क्या है NIIF?
राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) भारत का Sovereign Anchored Fund है, जिसका संचालन National Investment and Infrastructure Fund Limited द्वारा पेशेवर तरीके से किया जाता है. केंद्र सरकार की इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
वर्तमान में NIIF विभिन्न फंडों और निवेश रणनीतियों के तहत लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की पूंजी का प्रबंधन कर रहा है. अब तक यह कई सफल निवेशों के जरिए निवेशकों को लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की वापसी भी कर चुका है.
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी नई गति
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त निवेश से देश में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्धता बढ़ेगी, निजी और वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी.
Source: Ministry of Finance


