नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैलने जा रहा है. अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस आंदोलन को और तेज करते हुए शुक्रवार, 24 जुलाई को देशभर के सभी जिलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है. सीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्टर जारी कर छात्रों से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया है.
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CJP की छात्रों के लिए 5 मुख्य हिदायतें
आंदोलन को व्यवस्थित और कानून के दायरे में रखने के लिए पार्टी ने 5 प्रमुख गाइडलाइंस जारी की हैं. सबसे पहले स्थानीय पुलिस और प्रशासन को लिखित आवेदन देकर प्रदर्शन की आधिकारिक इजाजत लें. स्वीकृति पत्र (Approval Letter) प्रदर्शन स्थल पर साथ रखें और समय व जगह की पुष्टि करें. विरोध मार्च या किसी भी संभावित अड़चन के लिए समय रहते कानूनी राय (Legal Advice) लें. पोस्टर और क्रिएटिव डिजाइन करके सोशल मीडिया पर अपील करें ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र जुड़ सकें. पोस्टर और बैनर प्रिंट कराकर पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालें.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP
सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रश्नपत्र लीक मामलों के लिए त्वरित अदालतों (Fast-Track Courts) के गठन के ऐलान के बाद सीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की एक तस्वीर साझा की, जिस पर लिखा था कि मेरा नाम कुछ नहीं है.” वहीं पार्टी ने सीधे तौर पर पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख
इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शेगी नहीं. लीक मामलों में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. पीएम ने कहा कि हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. हालांकि, सीजेपी का तर्क है कि प्रधानमंत्री के इस बयान में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर कोई बात नहीं की गई है, इसीलिए वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं.


