नई दिल्ली. घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले में अदालत ने बुधवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा. अदालत ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिका में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है.
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दृष्टिबाधित लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा
यह जनहित याचिका 75 प्रतिशत दिव्यांग अधिवक्ता पुलकित लूथरा ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि एक अक्टूबर से लागू अनिवार्य बायोमीट्रिक आधार प्रमाणीकरण (BAA) की प्रक्रिया में आईरिस स्कैन भी शामिल है. इससे याचिकाकर्ता जैसे दृष्टिबाधित लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
याचिका के जरिए इस अनिवार्यता से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को अदालत के सामने रखा गया है. मामले में अब केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं को अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा.
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि आधार बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण का फैसला सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है.
हालांकि, उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि इस प्रावधान को लागू करते समय दिव्यांग लोगों की जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा. इस तरह सुनवाई में एक ओर सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने का सरकार का पक्ष सामने आया, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी का मुद्दा भी उठा.
अब दो सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है.
फिलहाल अदालत के सामने संबंधित पक्षों के जवाब आने बाकी हैं. आगे की कार्रवाई में यह स्पष्ट होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं याचिका में उठाए गए सवालों पर क्या पक्ष रखती हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान दिव्यांग लोगों की कठिनाइयों पर ध्यान देने का आश्वासन दिया गया है.
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