Nagastra 1R Delivery: भारतीय सेना की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि सामने आई है. सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को नागास्त्र-1R लोइटरिंग म्यूनिशन के 450 सिस्टम की डिलीवरी पूरी कर दी है. कंपनी के मुताबिक, यह इस सिस्टम की अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त आपूर्ति है. खास बात यह है कि इसे सेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है और यह निर्धारित परिस्थितियों में हमले को रोककर वापस लौटने की क्षमता भी रखता है.
यह भी पढ़ें- UPI यूजर्स और दुकानदारों के लिए बड़ा अपडेट! दिवाली के बाद लागू हो सकता है चुनिंदा पेमेंट पर MDR चार्ज, जानें क्या होगा असर
क्या है नागास्त्र-1R, कैसे करता है काम?
नागास्त्र-1R एक स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह निर्धारित क्षेत्र में हवा में रहकर लक्ष्य की पहचान और उस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सके. इसे आम तौर पर कामिकाजे ड्रोन की श्रेणी में रखा जाता है.
इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें हमला रद्द कर म्यूनिशन को वापस हासिल करने का विकल्प भी दिया गया है. हालांकि, यह सुविधा निर्धारित परिचालन परिस्थितियों और सिस्टम की क्षमताओं पर निर्भर करती है.
चार कंपनियों ने लिया था ट्रायल में हिस्सा
कंपनी के अनुसार, भारतीय सेना ने तकनीकी परीक्षणों के बाद आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत नागास्त्र-1R का ऑर्डर दिया था. परीक्षण में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन SDAL का दावा है कि सभी आवश्यक परिचालन मानकों को प्रदर्शित करने में वह अकेली कंपनी रही.
कंपनी ने बताया कि सिस्टम का कई बार लाइव ट्रायल किया गया. इन परीक्षणों में लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने की क्षमता का भी आकलन किया गया. नागास्त्र-1R के इस संस्करण को सेना की कम दूरी के अभियानों से जुड़ी विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
स्वदेशी रक्षा तकनीक पर बढ़ता जोर
नागास्त्र-1R की आपूर्ति को भारत में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कंपनी ने इसे सेना के लिए किफायती विकल्प बताते हुए कहा कि इसकी क्षमता और सटीकता से समझौता किए बिना इसे विकसित किया गया है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक स्तर पर ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का सैन्य अभियानों में इस्तेमाल बढ़ रहा है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने भी आधुनिक युद्ध में ड्रोन आधारित तकनीक और हवाई सुरक्षा प्रणालियों की भूमिका को चर्चा में रखा है.
‘भार्गवास्त्र’ से ‘सुदर्शन चक्र’ तक की तैयारी
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल ने इससे पहले स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ को लेकर भरोसा जताया था. उन्होंने कहा था कि यह तकनीक वर्ष 2030 तक प्रस्तावित ‘सुदर्शन चक्र’ एयर डिफेंस सिस्टम के विकास की दिशा में मददगार साबित हो सकती है.
नुवाल के मुताबिक, भार्गवास्त्र का रडार 10 किलोमीटर तक हवाई खतरों का पता लगा सकता है, जबकि इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) छह किलोमीटर तक की दूरी पर लक्ष्य को ट्रैक करने में सक्षम है. उनके अनुसार, यह क्षमता सेना की बताई गई 2.5 किलोमीटर की मौजूदा परिचालन आवश्यकता से अधिक है.
क्यों अहम हैं ये रक्षा प्रणालियां?
नागास्त्र-1R जैसे सिस्टम दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि भार्गवास्त्र जैसी काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उद्देश्य हवाई खतरों का मुकाबला करना है. दोनों तकनीकों की भूमिका अलग-अलग है, लेकिन आधुनिक युद्ध में इनकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है.
450 नागास्त्र-1R सिस्टम की डिलीवरी पूरी होने के साथ स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास और सेना की परिचालन जरूरतों के बीच तालमेल को लेकर एक अहम उपलब्धि दर्ज हुई है. अब इन प्रणालियों का वास्तविक परिचालन इस्तेमाल और प्रदर्शन उनकी प्रभावशीलता को और स्पष्ट करेगा.
यह भी पढ़ें- CJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी का समर्थन, INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन को लेकर कही बड़ी बात


