Namo Bharat Corridor: देश के प्रमुख शहरी क्षेत्रों के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने करीब 2,900 किलोमीटर लंबाई के संभावित नमो भारत कॉरिडोर की पहचान की है. इन कॉरिडोर के विकसित होने से बड़े शहरों और आसपास के इलाकों के बीच आवागमन आसान बनाने में मदद मिल सकती है.
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2,900 किलोमीटर के संभावित कॉरिडोर की जानकारी
एनसीआरटीसी ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन में अपनी प्रदर्शनी के जरिए संभावित नमो भारत कॉरिडोर और मौजूदा परियोजना की उपलब्धियों की जानकारी दी. सम्मेलन का आयोजन 23 और 24 अक्टूबर को हुआ. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया.
इन संभावित कॉरिडोर का उद्देश्य प्रमुख शहरी केंद्रों के बीच तेज और बेहतर रेल संपर्क विकसित करना है. हालांकि, 2,900 किलोमीटर के इन मार्गों को संभावित कॉरिडोर के रूप में पहचाना गया है. इन्हें अंतिम रूप देने और निर्माण की समयसीमा से जुड़ी जानकारी अलग-अलग परियोजनाओं के आधार पर सामने आएगी.
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर 4.5 करोड़ से अधिक यात्राएं
एनसीआरटीसी के मुताबिक, दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर अक्टूबर 2023 में परिचालन शुरू होने के बाद से अब तक 4.5 करोड़ से अधिक यात्री यात्राएं दर्ज की जा चुकी हैं. इस मार्ग पर रोजाना एक लाख से अधिक यात्री सफर कर रहे हैं.
यह कॉरिडोर 82 किलोमीटर लंबा है और इसमें 15 स्टेशन हैं. इसी बुनियादी ढांचे के साथ मेरठ मेट्रो सेवा को भी जोड़ा गया है, जिससे क्षेत्रीय रेल और शहर के भीतर की मेट्रो सेवा के बीच संपर्क बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है. एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने सम्मेलन में अतिथियों को नमो भारत की सुविधाओं, आधुनिक तकनीक और यात्रियों को मिल रहे लाभों की जानकारी दी.
नमो भारत स्टेशनों के आसपास बसेंगी आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं
एनसीआरटीसी केवल तेज रेल सेवा विकसित करने तक सीमित नहीं है. निगम नमो भारत स्टेशनों के आसपास आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं को भी योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य घर, कार्यालय, बाजार और परिवहन सुविधाओं को एक-दूसरे के करीब लाना है, ताकि लोगों का रोजाना आने-जाने का समय कम हो और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित बन सके.
प्रदर्शनी में दुहाई नमो भारत स्टेशन और सराय काले खां के आसपास प्रस्तावित विकास योजनाओं की जानकारी दी गई. इसके अलावा हरनंदीपुरम और न्यू मेरठ में नियोजित शहरी क्षेत्रों के विकास की योजनाएं भी प्रदर्शित की गईं.
डिजिटल तकनीक से समझाई जा रही नमो भारत की कार्यप्रणाली
इस वर्ष अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन का विषय ‘डिजिटल युग में शहरी सुगम्यता और बेहतर जीवन’ है. इसमें शहरी परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाने, परिवहन के अलग-अलग साधनों के बीच तालमेल बढ़ाने और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा की जा रही है.
एनसीआरटीसी की प्रदर्शनी में नमो भारत के मॉडल, चित्र और अन्य जानकारियां रखी गई हैं. आगंतुकों को संवर्धित वास्तविकता (AR) और आभासी वास्तविकता (VR) तकनीक के माध्यम से ट्रेन के विकास और रखरखाव की प्रक्रिया को समझने का अवसर भी मिल रहा है.
बड़े शहरों के बीच सफर आसान बनाने पर जोर
करीब 2,900 किलोमीटर के संभावित नमो भारत कॉरिडोर देश में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के विस्तार की संभावनाओं को दर्शाते हैं. यदि इन मार्गों को मंजूरी मिलती है और चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है, तो इससे बड़े शहरों और आसपास के क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर हो सकता है.
तेज रेल सेवा, परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर तालमेल और स्टेशनों के आसपास योजनाबद्ध विकास से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
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