Bihar News: बिहार के गया में विकसित हो रहा एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (IMC Gaya) राज्य के बड़े औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो सकता है. अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर का हिस्सा इस परियोजना को 1,670 एकड़ में विकसित किया जा रहा है. परियोजना के लिए 1,339 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित है, जबकि इसके माध्यम से करीब 16,524 करोड़ रुपये के निवेश और 1.09 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है.
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1,670 एकड़ में विकसित होगा औद्योगिक क्षेत्र
IMC गया को आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है. इसके तहत उद्योगों को जरूरत के मुताबिक बुनियादी ढांचा और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कंपनियों को उत्पादन शुरू करने के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें. परियोजना के लिए 1,670 एकड़ भूमि के अधिग्रहण पर बिहार सरकार 462 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. फिलहाल निर्माण कार्य शुरुआती चरण में है और परियोजना को वर्ष 2029 के अंत तक पूरा करने का अनुमान है.
16,524 करोड़ के निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
IMC गया से करीब 1.09 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. इसी उद्देश्य से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परियोजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष आग्रह किया है. परियोजना के लिए केंद्र सरकार से इक्विटी के रूप में अब तक 135 करोड़ रुपये मिल चुके हैं. केंद्र से कुल 462 करोड़ रुपये इक्विटी और 345 करोड़ रुपये ऋण के रूप में मिलने का प्रावधान है. शेष लागत की व्यवस्था राज्य सरकार को अपने स्तर पर करनी है.
किन उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा?
IMC गया में कई क्षेत्रों से जुड़े उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं.
- कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण
- रेडीमेड गारमेंट और टेक्निकल इंडस्ट्री
- ऑटो पार्ट्स
- स्टील आधारित उत्पाद
- एयरोस्पेस एवं डिफेंस
- भवन निर्माण सामग्री
- फर्नीचर
- हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट
इन उद्योगों के आने से गया और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ-साथ सहायक कारोबार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
सड़क, जलाशय और बिजली पर होगा निवेश
औद्योगिक क्लस्टर को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सड़क संपर्क, जल आपूर्ति और बिजली जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जाना है.
- सड़क संपर्क: स्वर्णिम चतुर्भुज से डोभी के पास IMC गया को जोड़ने के लिए सात किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की योजना है. इस पर करीब 142 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
- जल आपूर्ति: औद्योगिक क्षेत्र में पानी की निरंतर उपलब्धता के लिए 324 एकड़ में जलाशय बनाया जाएगा. लीलाजन नदी से पानी प्राप्त करने वाले इस जलाशय की क्षमता 8.5 एमसीएम होगी. इसके निर्माण पर करीब 428 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
- बिजली व्यवस्था: परियोजना की चारदीवारी तक 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन पहुंचाने के लिए बिहार सरकार ने स्वीकृति दी है.
अगस्त 2024 में मिली थी परियोजना को मंजूरी
IMC गया केंद्र सरकार की केंद्रीय क्षेत्र की योजना का हिस्सा है. आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने अगस्त 2024 में इस योजना को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के जरिए निवेश आकर्षित करना तथा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना है.
परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 6 जनवरी 2025 को बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) का गठन किया गया. इसके बाद 18 मार्च 2025 को पर्यावरण मंजूरी मिली और 28 जुलाई 2025 को कार्यक्रम प्रबंधक नियुक्त किया गया.
12 फरवरी 2026 को इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) ठेकेदार की नियुक्ति हुई तथा सर्वेक्षण कार्य शुरू हुआ. आंतरिक प्रमुख बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ठेकेदार की नियुक्ति से 36 से 42 महीने की अवधि निर्धारित की गई है.
अमृतसर-कोलकाता कॉरिडोर में कई औद्योगिक क्लस्टर
देश में 12 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं. इनके तहत कुल 25,975 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक क्लस्टर बनाने की योजना है, जिन पर अनुमानित 28,602 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इनमें अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर भी शामिल है.
इस कॉरिडोर के तहत खुरपिया (उत्तराखंड), राजपुरा (पंजाब), हिसार (हरियाणा), आगरा और प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के साथ गया (बिहार) में भी औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं.
IMC गया के पूरा होने के बाद बिहार में विनिर्माण, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक असर परियोजना के समय पर पूरा होने और उद्योगों के निवेश पर निर्भर करेगा.
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