नई दिल्ली. हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है और विधिपूर्वक व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से साधक को पापों से मुक्ति मिलने और जीवन में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है.
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है. साल 2026 में अजा एकादशी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. इस दौरान कई ऐसे काम बताए गए हैं, जिन्हें व्रत के दिन करने से बचना चाहिए.
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अजा एकादशी कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को सुबह 9 बजकर 59 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 7 सितंबर को सुबह 7 बजकर 33 मिनट पर होगा.
एकादशी तिथि 6 सितंबर को पड़ने के कारण इसी दिन अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. अगले दिन यानी 7 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा.
अजा एकादशी पर चावल का सेवन न करें
अजा एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करने की धार्मिक मान्यता है. मान्यता के अनुसार, एकादशी तिथि पर चावल खाने से मनुष्य को अगले जन्म में केंचुए की योनि में जन्म लेना पड़ सकता है.
इसी वजह से व्रत रखने वाले लोग इस दिन चावल से दूरी बनाए रखने की मान्यता का पालन करते हैं.
तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न दें जल
अजा एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी बचना चाहिए. दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी तिथि पर तुलसी माता व्रत रखती हैं. ऐसे में इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने या तुलसी के पौधे में जल देने से बचने की बात कही गई है.
मान्यता है कि ऐसा करने से तुलसी माता का व्रत टूट सकता है और जीवन में धन संबंधी परेशानियां आ सकती हैं.
तामसिक भोजन से रहें दूर
एकादशी के व्रत में खान-पान से जुड़े नियमों का भी विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है. इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का सेवन करने से अशुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. इसलिए व्रत के दौरान सात्विक और नियमों के अनुरूप आहार रखने की सलाह दी जाती है.
क्रोध, चुगली और निंदा से बचें
अजा एकादशी के दिन सिर्फ खान-पान ही नहीं, बल्कि व्यवहार और विचारों को लेकर भी सावधानी बरतने की मान्यता है. व्रत रखने वाले साधक को किसी के बारे में गलत विचार नहीं रखने चाहिए.
इस दिन किसी पर क्रोध करने, चुगली करने और दूसरों की निंदा करने से बचने की बात कही गई है. मन को शांत रखने और भगवान विष्णु के नाम का जाप करने की सलाह दी जाती है.
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अजा एकादशी पर रखें इन बातों का ध्यान
अजा एकादशी के दौरान धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक व्रत से जुड़े नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है. चावल से परहेज, तुलसी से जुड़े नियम, तामसिक भोजन से दूरी और क्रोध या निंदा से बचना इसी का हिस्सा बताया गया है.
2026 में अजा एकादशी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा और 7 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा. एकादशी तिथि के आरंभ और समापन का समय भी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है.


