सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों को सामान और सेवाएं बेचने वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSME) के लिए राहत की खबर है. गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने अपने ट्रांजैक्शन शुल्क में कटौती की है. अब ₹10 लाख तक के ऑर्डर पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगेगा. पहले यह सीमा ₹5 लाख थी. इसके अलावा, बड़े ऑर्डर पर लगने वाले शुल्क की अधिकतम सीमा भी काफी कम कर दी गई है.
GeM ने लघु उद्योग भारती (LUB) के साथ मिलकर ‘GeM संवाद 2026’ के तहत एक कार्यक्रम आयोजित किया. इसमें MSME को सरकारी खरीद प्रक्रिया से जोड़ने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी भागीदारी बढ़ाने और कारोबार के लिए वित्तीय सहायता आसान बनाने से जुड़े सुधारों की जानकारी दी गई.
ट्रांजैक्शन शुल्क घटाकर 0.30% किया गया
GeM के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर किए गए सुधारों का उद्देश्य MSME के लिए कारोबार की लागत कम करना और सरकारी खरीद की प्रक्रिया को आसान बनाना है.
GeM ने ट्रांजैक्शन शुल्क को ऑर्डर की कीमत के 0.50% से घटाकर 0.30% कर दिया है. अब ₹10 लाख तक के ऑर्डर पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं देना होगा. पहले यह छूट ₹5 लाख तक के ऑर्डर पर मिलती थी.
वहीं, ₹10 करोड़ से अधिक के ऑर्डर के लिए ट्रांजैक्शन शुल्क की अधिकतम सीमा ₹3 लाख तय की गई है. पहले यह सीमा ₹72.50 लाख थी. GeM के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले करीब 97% ऑर्डरों पर अब कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगता है.
इन बदलावों से उन छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है जो सरकारी विभागों को सामान या सेवाएं सप्लाई करना चाहते हैं, लेकिन अतिरिक्त लागत के कारण बड़े खरीदारों तक पहुंचने में मुश्किल महसूस करते हैं.
OEM वेंडर असेसमेंट शुल्क में 92% तक कटौती
GeM ने विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन और प्लेटफॉर्म से जुड़ने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए हैं. जुलाई 2025 में ऑनबोर्डिंग के दौरान जमा की जाने वाली ‘कॉशन मनी’ यानी सुरक्षा राशि की अनिवार्यता खत्म कर दी गई थी.
इसके अलावा, जनवरी 2024 से ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) पर लागू वेंडर असेसमेंट शुल्क में 66% से 92% तक की कटौती की गई है. इन बदलावों का मकसद नए विक्रेताओं के लिए GeM पर कारोबार शुरू करने की लागत कम करना है.
GeM और LUB ने किए 108 वर्चुअल सम्मेलन
GeM और लघु उद्योग भारती के बीच 2024 में हुए समझौते के बाद देशभर में कई प्रत्यक्ष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. दोनों संगठनों ने मिलकर 108 वर्चुअल सम्मेलनों का आयोजन भी किया है.
इन कार्यक्रमों के जरिए MSME प्रतिनिधियों को GeM पर उपलब्ध सुविधाओं, डिजिटल खरीद प्रक्रिया और सरकारी ऑर्डर हासिल करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है. LUB अपने देशव्यापी कार्यालय नेटवर्क, हर सप्ताह होने वाली GeM-LUB वर्चुअल कॉन्फ्रेंस और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों के जरिए संचालित फैसिलिटेशन काउंटरों की मदद से इस पहुंच को और बढ़ाने की योजना बना रहा है.
TReDS एक्सचेंजों से जुड़ने पर भुगतान में मिल सकती है मदद
कार्यक्रम में GeM के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजीत बी. चव्हाण ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप GeM को सभी पांच ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) एक्सचेंजों से जोड़ दिया गया है.
इस पहल का उद्देश्य MSME के लिए कार्यशील पूंजी और समय पर भुगतान से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करना है. छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी ऑर्डर मिलने के बाद सामान तैयार करने, कर्मचारियों को भुगतान करने और सप्लाई पूरी करने के लिए पूंजी की जरूरत होती है. ऐसे में भुगतान से जुड़े विकल्प बेहतर होने पर कारोबार चलाने में मदद मिल सकती है.
GeM SAHAY से बिना कोलेटरल लोन की सुविधा
अजीत बी. चव्हाण ने GeM SAHAY का भी जिक्र किया. इसके तहत GeM पर मिले परचेज ऑर्डर के आधार पर MSME को बिना किसी कोलेटरल के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया.
इस सुविधा और TReDS कनेक्टिविटी से कारोबारियों को सरकारी ऑर्डर पूरा करने के लिए जरूरी कार्यशील पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, किसी भी वित्तीय सुविधा का लाभ संबंधित शर्तों और पात्रता के अनुसार मिलेगा.
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आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 पर जोर
LUB के अध्यक्ष मधुसूदन दादू और राष्ट्रीय महासचिव ओम प्रकाश गुप्ता ने GeM के साथ साझेदारी को और मजबूत करने की योजनाओं की जानकारी दी. वहीं, मिहिर कुमार ने कहा कि GeM का लक्ष्य एक ऐसा भरोसेमंद विक्रेता इकोसिस्टम बनाना है, जहां डिजिटल माध्यम से कारोबार के अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध हों.
कार्यक्रम में LUB के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और GeM नोडल जनक भाटिया सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे. आयोजकों के अनुसार, शुल्क में कटौती, ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में बदलाव और वित्तीय सहायता से जुड़ी पहल MSME की सरकारी खरीद में भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकती हैं. ये प्रयास आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों से भी जुड़े हैं.
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