किसानों से कृषि उपज की सरकारी खरीद और भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म e-Samyukti के जरिए खरीद अभियान चलाया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 43 लाख से अधिक किसानों से करीब 38 लाख मीट्रिक टन कृषि उपज की खरीद की गई है. वहीं, किसानों को ₹13,000 करोड़ से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है.
e-Samyukti ने सरकारी खरीद की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और किसानों तथा सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर फोकस किया है. इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ किसानों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से डिजिटल भुगतान उपलब्ध कराना है.
क्या है e-Samyukti प्लेटफॉर्म?
e-Samyukti, नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) की एक डिजिटल पहल है. इसे कृषि उपज की खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और किसानों तथा सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
इस प्लेटफॉर्म के जरिए खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है. डिजिटल भुगतान व्यवस्था के माध्यम से किसानों तक रकम जल्दी और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
सरकार की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 43 लाख से अधिक किसानों से करीब 38 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद की गई है. इसके बदले किसानों को ₹13,000 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया गया है.
किसानों के लिए MSP क्यों है अहम?
न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP किसानों को उनकी फसलों के लिए समर्थन देने का एक प्रमुख सरकारी माध्यम है. इसके तहत सरकार निर्धारित फसलों की खरीद करती है. इसका उद्देश्य किसानों को कृषि उपज के लिए घोषित समर्थन मूल्य के जरिए सहायता देना है.
सरकार हर साल 22 निर्धारित कृषि फसलों के लिए MSP घोषित करती है. सरकारी खरीद और MSP से जुड़े भुगतान किसानों को उनकी उपज के बदले आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था का हिस्सा हैं.
e-Samyukti जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खरीद और भुगतान की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है. इससे सरकारी खरीद से जुड़े आंकड़ों और भुगतान व्यवस्था को डिजिटल तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है.
रबी सीजन 2027-28 के लिए MSP में बढ़ोतरी
सरकार ने 30 सितंबर 2026 को मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए सभी निर्धारित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस सीजन में करीब 324 लाख मीट्रिक टन कृषि उपज की खरीद का अनुमान है.
इस खरीद के बदले किसानों को लगभग ₹90,962 करोड़ का भुगतान किए जाने का अनुमान जताया गया है. यह आंकड़ा अनुमानित खरीद और उससे जुड़े संभावित भुगतान को दर्शाता है. इसे पहले से किसानों को भुगतान की जा चुकी रकम नहीं माना जाना चाहिए.
रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए MSP में बढ़ोतरी और खरीद के अनुमान से सरकार की कृषि खरीद व्यवस्था के पैमाने का पता चलता है. हालांकि, फसलवार MSP, अलग-अलग फसलों की खरीद मात्रा और भुगतान का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है.
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डिजिटल खरीद और भुगतान व्यवस्था पर जोर
सरकार के अनुसार, कृषि उपज की खरीद और MSP भुगतान का बढ़ता पैमाना किसानों को समर्थन देने की व्यवस्था के विस्तार को दिखाता है. e-Samyukti के जरिए खरीद प्रक्रिया को डिजिटल रूप से संचालित करने और किसानों तक सुरक्षित भुगतान पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है.
प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 43 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच, करीब 38 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद और ₹13,000 करोड़ से ज्यादा के भुगतान की जानकारी दी गई है. वहीं, रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए 324 लाख मीट्रिक टन खरीद और ₹90,962 करोड़ के भुगतान का अनुमान सामने आया है.
कुल मिलाकर, e-Samyukti डिजिटल कृषि खरीद व्यवस्था का हिस्सा है, जबकि MSP सरकारी खरीद के जरिए किसानों को समर्थन देने का एक प्रमुख माध्यम बना हुआ है. आगामी रबी सीजन के लिए घोषित खरीद और भुगतान के अनुमान का वास्तविक परिणाम खरीद की प्रगति और किसानों को किए जाने वाले भुगतान के आंकड़ों से स्पष्ट होगा.
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