Haridwar Industrial Hub Development: अब तक गंगा आस्था और आध्यात्म का प्रतीक रही है, लेकिन अब यही धरती रोजगार और उद्योग की नई कहानी भी लिख रही है. धर्मनगरी हरिद्वार तेजी से एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभर रहा है, जहां विकास की रफ्तार ने युवाओं की उम्मीदों को नई उड़ान दे दी है.
सरकार की नीतियों से निवेशकों में उत्साह
वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 2,946 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. खास बात यह रही कि कुल 364 प्रस्तावों में से केवल एक ही अस्वीकृत हुआ, जो सरकार की पारदर्शी और सरल व्यवस्था को दर्शाता है. इन निवेशों से 23,212 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है,यानी हजारों युवाओं के सपनों को अब यहीं अपने शहर में पंख मिलेंगे.
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बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार की सिंगल विंडो क्लियरेंस नीति ने निवेशकों के लिए राह आसान कर दी है. अब मंजूरी की प्रक्रिया तेज और झंझटमुक्त हो गई है, जिससे बड़ी कंपनियां भी हरिद्वार की ओर आकर्षित हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर से बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता इस जिले को निवेश का पसंदीदा ठिकाना बना रही है.
औद्योगिक विस्तार से हजारों को रोजगार
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही 107 करोड़ रुपये के 18 और प्रस्तावों को हरी झंडी मिल चुकी है, जिनसे 801 लोगों को रोजगार मिलेगा. वहीं, पिछले एक दशक में इंवेस्ट उत्तराखंड के तहत 3,087 प्रस्तावों से 15,011 करोड़ रुपये का निवेश और 1.05 लाख से अधिक रोजगार सृजित हो चुके हैं,जो हरिद्वार के बदलते स्वरूप की गवाही देते हैं.
फार्मा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और प्लास्टिक पैकेजिंग जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा निवेश आ रहा है. सिडकुल क्षेत्र इन गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन चुका है, जहां पहले से ही कई बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं. अब इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, एपीआई और फॉर्मुलेशन यूनिट्स जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम हो रहा है. इस औद्योगिक उछाल का सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है. छोटे उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को नए अवसर मिल रहे हैं, जबकि ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है.
हालांकि, इस तेजी के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, जैसे पानी, बिजली और कचरा प्रबंधन. लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है. हरिद्वार अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि अवसरों की नई धरती बन चुका है. जहां गंगा के साथ-साथ विकास की धारा भी पूरे वेग से बह रही है.


