भारत 25 और 26 जून 2026 को हरियाणा में 11वीं BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है. यह बैठक भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित की जाएगी और इसमें सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी तथा ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे. बैठक का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, तकनीकी नवाचार और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करना है.
भारत ने BRICS ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है. पिछले वर्ष ब्राजील में आयोजित BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने 2026 में अगली बैठक की मेजबानी का निमंत्रण दिया था.
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ऊर्जा सुरक्षा और हरित परिवर्तन पर रहेगा फोकस
BRICS ऊर्जा ट्रैक 2026 को तीन प्रमुख स्तंभों – ऊर्जा सुरक्षा एवं स्थिरता, ऊर्जा पहुंच एवं समानता तथा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार – के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है. इसी क्रम में ऊर्जा मंत्रियों की यह बैठक विभिन्न देशों के बीच साझा रणनीति तैयार करने का मंच बनेगी.
बैठक में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ ईंधन और उभरती तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है. BRICS देश वैश्विक ऊर्जा मांग और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह बैठक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
भारत की BRICS अध्यक्षता को मिलेगा बल
भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है. भारत की अध्यक्षता का प्रमुख विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है. इसी थीम के तहत विभिन्न मंत्रीस्तरीय और कार्य समूह बैठकों का आयोजन किया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा मंत्रियों की यह बैठक BRICS देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दे सकती है. इससे ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लक्ष्यों और टिकाऊ विकास से जुड़े साझा प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी.
वैश्विक दक्षिण की ऊर्जा प्राथमिकताओं पर चर्चा
BRICS मंच लगातार विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों, ऊर्जा पहुंच और स्वच्छ ऊर्जा वित्तपोषण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहा है. भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक वैश्विक दक्षिण की ऊर्जा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करेगी.
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग, अनुसंधान, नवाचार और ऊर्जा अवसंरचना विकास से जुड़े नए प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है.
स्रोत: Ministry Of Power


