नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. शनिवार को विश्वविद्यालय ने अगले आदेश तक सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करने का निर्देश दिया. प्रशासन ने इसे छात्रों की सुरक्षा और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एहतियाती कदम बताया है. वहीं, छात्र संगठनों ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया है.
विश्वविद्यालय की ओर से जारी नोटिस में सभी डीन, विभागाध्यक्षों, निदेशकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं के कार्यक्रम का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. शिक्षकों से ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जरूरी इंतजाम करने और विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने को भी कहा गया है.
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छात्रसंघ की बहाली की मांग, 13वें दिन भी भूख हड़ताल
जामिया में छात्रसंघ की बहाली को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर से जारी है. शनिवार को पांच छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल के 13वें दिन भी डटे रहे. प्रदर्शनकारी छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करने के साथ मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की मांग कर रहे हैं.
छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. वे निलंबित छात्रों को बहाल करने और प्रॉक्टर तथा अनुशासन समिति की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं.
भूख हड़ताल में शामिल छात्र जासिम अली खान ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया और छात्रों का निलंबन रद्द करने की मांग की. वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी अनस ने कहा कि छात्रसंघ की बहाली सहित उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
बातचीत के बीच छात्रों पर हमला
छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बातचीत के दौरान छात्रों के साथ मारपीट शुरू कर दी. संगठन ने दावा किया कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और उनके प्रदर्शन स्थल को निशाना बनाया गया. हालांकि, छात्रों के साथ कथित मारपीट के आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है.
‘फ्री कश्मीर’ नारे की जांच कराने की मांग
विश्वविद्यालय परिसर में ‘Free Kashmir’ नारे वाली कथित ग्रैफिटी को लेकर भी विवाद सामने आया है. इस मामले पर प्रदर्शनकारी छात्र अनस ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने के लिए अलग तरह की कहानी पेश की जा रही है. अनस ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की जांच कराने और परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने की मांग की. उनका दावा है कि छात्रसंघ की बहाली के लिए चल रहे प्रदर्शन में शामिल छात्रों का इस ग्रैफिटी से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है और यह पता लगाया जाना चाहिए कि नारे किसने लिखे. अनस ने यह भी कहा कि छात्रों का आंदोलन शुरुआत से शांतिपूर्ण रहा है और आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा.
2006 से भंग है जामिया का छात्रसंघ
जामिया में छात्रसंघ की बहाली का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. विश्वविद्यालय का छात्रसंघ मार्च 2006 में भंग कर दिया गया था. अब छात्र इसकी बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में दिल्ली पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में निर्धारित प्रदर्शन स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश के बाद विरोध तेज होने की बात सामने आई थी. फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन के ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के फैसले के बीच छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर स्थिति बनी हुई है. आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं.
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