Vastu Dosh Nivaran: घर बन जाने के बाद यदि उसमें किसी तरह की वास्तु संबंधी कमी रह जाए तो उसे तोड़कर दोबारा बनवाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. ऐसे में कानपुर के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य दिनेश कुछ सरल और प्रभावी उपाय बताते हैं, जिनकी मदद से बिना किसी तोड़-फोड़ के वास्तुदोष के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है. आइए विस्तार से जानते हैं ये उपाय.
पंडित दिनेश के अनुसार घर के निर्माण में हुई गलतियों को वास्तु शास्त्र में वास्तुदोष कहा जाता है. ये दोष व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं. घर के अंदर या बाहर कई प्रकार के वास्तुदोष हो सकते हैं. यदि मकान तिकोना हो, कॉर्नर प्लॉट पर बना हो, चौराहे पर स्थित हो या दक्षिणमुखी हो, तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. हालांकि कुछ आसान उपायों से इन दोषों का प्रभाव कम किया जा सकता है.
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पंचतत्व और दिशाओं का महत्व
वास्तु शास्त्र में घर को पंचतत्वों से निर्मित माना गया है.
उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) जल तत्व का प्रतीक है.
उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) वायु तत्व को दर्शाता है.
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) अग्नि तत्व से संबंधित है.
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है.
घर का मध्य भाग ब्रह्मस्थान कहलाता है, जिसे आकाश तत्व माना गया है.
जिस प्रकार मानव शरीर पंचतत्वों से बना है, उसी प्रकार घर भी इन्हीं तत्वों का संतुलन है. सुखी और समृद्ध जीवन के लिए इन दिशाओं का दोषमुक्त होना आवश्यक माना गया है.
प्रमुख वास्तु उपाय
- स्वास्तिक चिन्ह
मुख्य द्वार पर सिंदूर से नौ अंगुल लंबा और चौड़ा स्वास्तिक बनाना शुभ माना गया है. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. प्रत्येक मंगलवार को यह उपाय करने से मंगल ग्रह से जुड़े दोष भी शांत होते हैं. - रसोई में बल्ब
रसोई का स्थान आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में श्रेष्ठ माना गया है. यदि रसोई गलत दिशा में बनी हो, तो आग्नेय कोण में एक बल्ब लगाकर प्रतिदिन जलाएं. इससे अग्नि तत्व संतुलित होता है. - घोड़े की नाल
मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल यू आकार में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा मिलती है. ध्यान रखें कि नाल गिरी हुई हो या आपके सामने उतारी गई हो. - कलश स्थापना
उत्तर-पूर्व कोने में अखंडित कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है. इसे भगवान गणेश का प्रतीक माना गया है, जो विघ्नहर्ता हैं. इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. - पूजा-पाठ
घर में नियमित पूजा, भजन या कम से कम गायत्री मंत्र और शांति पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वास्तुदोष कम होता है. - सोने की दिशा
पश्चिम की ओर मुंह करके सोने से बुरे सपने और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना लाभकारी माना गया है. - कूड़ा रखने की दिशा
उत्तर-पूर्व में कचरा या भारी वस्तुएं न रखें. मुख्य द्वार के दोनों ओर अशोक का पेड़ लगाना शुभ माना गया है. - शौचालय की दिशा
शौचालय के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा उपयुक्त मानी गई है. यदि पूर्व दिशा में बनाना पड़े तो सीट इस प्रकार लगाएं कि बैठते समय मुंह पश्चिम या दक्षिण की ओर हो.
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कानपुर के पंडित दिनेश का कहना है कि इन सरल उपायों को अपनाकर बिना किसी तोड़-फोड़ के घर के वास्तुदोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है.


