भारत में दशकों से रसोई का मतलब गैस सिलेंडर और चूल्हा माना जाता रहा है. लेकिन अब तस्वीर बदल सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत और तेल-गैस पर निर्भरता कम करने की अपील के बाद सरकार बड़े स्तर पर इंडक्शन कुकटॉप को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी कंपनी Energy Efficiency Services Limited (EESL) ने 2 लाख इंडक्शन कुकटॉप खरीदने के लिए पायलट टेंडर भी जारी किया है.
माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह संख्या 60 से 80 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है.
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आखिर सरकार इंडक्शन चूल्हों पर इतना जोर क्यों दे रही?
इसके पीछे कई बड़ी वजहें बताई जा रही हैं. हाल के महीनों में:
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- खाड़ी क्षेत्र में तनाव
- और LPG आपूर्ति को लेकर चिंता
ने सरकार का ध्यान वैकल्पिक कुकिंग व्यवस्था की तरफ बढ़ाया है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत फिलहाल सीमित अवधि का LPG स्टॉक बनाए हुए है. ऐसे में सरकार इलेक्ट्रिक कुकिंग को भविष्य के विकल्प के तौर पर देख रही है.
क्या है National Efficient Cooking Programme?
सरकार की यह पूरी पहल National Efficient Cooking Programme (NECP) के तहत आगे बढ़ाई जा रही है. यह योजना Energy Efficiency Services Limited (EESL) चला रही है, जो पहले:
- LED बल्ब
- ऊर्जा बचाने वाले पंखे
- और बिजली दक्ष उपकरण
को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए भी जानी जाती रही है. PIB के अनुसार NECP का उद्देश्य:
- ऊर्जा दक्ष इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देना
- प्रदूषण कम करना
- और कम लागत वाली आधुनिक कुकिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
इंडक्शन चूल्हा आखिर इतना खास क्यों माना जा रहा?
इंडक्शन कुकटॉप सीधे बर्तन को गर्म करता है. इसमें:
- गैस की जरूरत नहीं होती
- धुआं नहीं निकलता
- और ऊर्जा कम बर्बाद होती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- यह पारंपरिक गैस कुकिंग से 25% से 30% तक सस्ता पड़ सकता है
- और लंबे समय में घरेलू खर्च कम कर सकता है.
क्या हर घर में मिलेगा इंडक्शन चूल्हा?
फिलहाल सरकार की तरफ से ऐसा कोई सार्वभौमिक मुफ्त वितरण घोषित नहीं किया गया है. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक EESL:
- बड़े पैमाने पर खरीद
- और कम कीमत पर उपलब्धता
मॉडल पर काम कर रही है. यही मॉडल पहले LED बल्ब योजना में इस्तेमाल किया गया था, जहां बड़े स्तर पर खरीद कर कीमत काफी कम कर दी गई थी.
क्या LPG का दौर खत्म हो जाएगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. भारत में करोड़ों परिवार अभी भी LPG पर निर्भर हैं. खासकर:
- ग्रामीण इलाकों
- छोटे शहरों
- और बिजली कटौती वाले क्षेत्रों
में इंडक्शन पूरी तरह गैस की जगह नहीं ले सकता. हालांकि सरकार “मिश्रित रसोई मॉडल” की तरफ बढ़ती दिख रही है, जहां:
- LPG
- सौर ऊर्जा
- और बिजली आधारित कुकिंग
साथ-साथ इस्तेमाल हो सकती है.
PM Surya Ghar योजना से क्या संबंध है?
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सरकार इंडक्शन कुकिंग को PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana से भी जोड़कर देख रही है. इस योजना के तहत:
- घरों में rooftop solar लगाने
- और मुफ्त/कम लागत वाली बिजली इस्तेमाल
को बढ़ावा दिया जा रहा है. अगर घर में सौर ऊर्जा उपलब्ध होगी, तो लोग:
- खाना बनाने
- पानी गर्म करने
- और छोटे उपकरण चलाने
के लिए बिजली का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं.
क्या बिजली बिल बढ़ने का खतरा भी है?
यही सवाल अब सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. अगर करोड़ों लोग गैस की जगह इंडक्शन अपनाते हैं, तो बिजली मांग बढ़ सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे भारत की peak power demand में 27 GW तक अतिरिक्त दबाव आ सकता है. यानी:
- बिजली ढांचे को मजबूत करना
- ग्रिड क्षमता बढ़ाना
- और सस्ती बिजली उपलब्ध कराना
भी जरूरी होगा.
राज्यों में क्या शुरू हो चुका है?
आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में NECP के तहत:
- आंगनवाड़ी केंद्रों
- और सरकारी संस्थानों
में इंडक्शन चूल्हे लगाए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां हजारों इंडक्शन स्टोव पहले ही वितरित किए जा चुके हैं और बाकी केंद्रों में भी लगाने की प्रक्रिया जारी है.
घरेलू कंपनियों को क्यों कहा गया “तैयार रहो”?
सरकार अब चाहती है कि:
- देश में इंडक्शन कुकटॉप का स्थानीय उत्पादन बढ़े
- आयात पर निर्भरता घटे
- और बड़े पैमाने पर निर्माण हो.
इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को पहले से उत्पादन क्षमता बढ़ाने को कहा गया है.
लोग सोशल मीडिया पर क्या कह रहे?
सोशल मीडिया पर इस योजना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कुछ लोग कह रहे हैं:
- “भविष्य की रसोई अब इलेक्ट्रिक होगी”
- “गैस सिलेंडर से राहत मिलेगी”
वहीं कुछ लोगों की चिंता है:
- गांवों में बिजली व्यवस्था
- ऊंचे बिजली बिल
- और इंडक्शन के लिए खास बर्तनों की जरूरत
को लेकर.
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सबसे अहम बात क्या है?
सरकार अब भारतीय रसोई को धीरे-धीरे “ऊर्जा दक्ष” और “बिजली आधारित” बनाने की दिशा में बढ़ती दिख रही है. हालांकि गैस चूल्हे तुरंत गायब नहीं होने वाले, लेकिन:
- इंडक्शन कुकिंग
- rooftop solar
- और स्मार्ट किचन
आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकते हैं. PM मोदी की अपील के बाद शुरू हुई यह पहल सिर्फ रसोई बदलने की नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति बदलने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है.
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