Vitamin D Deficiency Causes: शरीर में विटामिन डी की कमी होना सेहत के लिए गंभीर समस्या बन सकता है. विटामिन डी न केवल हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, बल्कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. आमतौर पर विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए सुबह की धूप लेने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा कई लोग डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी के सप्लीमेंट भी लेते हैं. कई बार ऐसा देखा जाता है कि धूप लेने और सप्लीमेंट लेने के बाद भी शरीर में विटामिन डी का स्तर कम बना रहता है. ऐसी स्थिति में जरूरी है कि इसके पीछे छिपे असली कारण को समझा जाए.
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दरअसल, यह भी देखना जरूरी होता है कि हम जो भोजन और पोषक तत्व ले रहे हैं, क्या हमारा शरीर उनका सही तरीके से उपयोग कर पा रहा है या नहीं. न्यूट्रिशनिस्ट नेहा रंगलानी ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया है कि शरीर में विटामिन डी का स्तर सही बनाए रखने के लिए बाइल फ्लो का ठीक होना और तनाव से बचना बेहद जरूरी है. इसके अलावा शरीर का मेटाबॉलिज्म भी सही होना चाहिए, ताकि विटामिन और अन्य पोषक तत्वों का शरीर बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सके.
सबसे पहले बात करते हैं बाइल फ्लो की. विटामिन डी एक फैट सॉल्युबल विटामिन होता है, यानी इसे शरीर में अवशोषित होने के लिए फैट की जरूरत होती है. इसके लिए शरीर में बाइल यानी पित्त का पर्याप्त मात्रा में बनना जरूरी है. लिवर बाइल का निर्माण करता है, जो बाद में गॉल ब्लैडर में स्टोर रहता है. बाइल का मुख्य काम फैट को ब्रेक डाउन करना होता है, जिससे शरीर फैट सॉल्युबल विटामिन जैसे विटामिन डी, विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन के को सही तरीके से अवशोषित कर सके. अगर शरीर में बाइल फ्लो कम होता है, तो इन विटामिन्स का सही अवशोषण नहीं हो पाता. यही वजह है कि कई बार अच्छा भोजन करने, धूप लेने और सप्लीमेंट लेने के बावजूद शरीर में विटामिन डी का स्तर कम बना रहता है.
बाइल फ्लो को बेहतर बनाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इसके लिए कड़वे स्वाद वाली सब्जियों का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है, जैसे करेला, मेथी, मूली और अरुगुला के पत्ते. इसके अलावा डाइट में हेल्दी फैट जैसे ऑलिव ऑयल, नट्स और सीड्स को शामिल करना चाहिए. बहुत ज्यादा लो-फैट डाइट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फैट सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में दिक्कत हो सकती है. भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी बाइल फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही लिवर को स्वस्थ रखने के लिए साबुत अनाज का सेवन भी लाभकारी माना जाता है.
विटामिन डी की कमी का एक और बड़ा कारण लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी हो सकता है. शरीर में कोलेस्ट्रॉल का उपयोग कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाने के लिए होता है, जिनमें कार्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन और विटामिन डी से जुड़े हार्मोन शामिल हैं. लेकिन जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है और अधिक मात्रा में कार्टिसोल का उत्पादन करने लगता है. ऐसे में विटामिन डी से जुड़े हार्मोन का उत्पादन कम हो सकता है. इसके अलावा तनाव के कारण शरीर में सूजन भी बढ़ जाती है, जिससे शरीर में विटामिन डी की आवश्यकता और बढ़ जाती है. यही कारण है कि कई बार सप्लीमेंट लेने के बाद भी विटामिन डी की कमी महसूस होती रहती है.
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तनाव को कम करने के लिए जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव करना जरूरी है. सबसे पहले पर्याप्त और अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है. रोजाना सुबह की धूप में कुछ समय बिताना भी फायदेमंद होता है. इसके अलावा नियमित रूप से सांस से जुड़े व्यायाम और मेडिटेशन करना तनाव को कम करने में मदद करता है. भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जो ब्लड शुगर को संतुलित बनाए रखें. इसके साथ ही प्रकृति के बीच समय बिताना और रोजाना शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है. इन उपायों से हार्मोन संतुलन बेहतर होता है और शरीर पोषक तत्वों का सही तरीके से उपयोग कर पाता है.


